तल्लीताल के सिपाहीधारा की पहाड़ी से टूटकर गिरे बोल्डर के बाद जिम्मेदार अधिकारी मंगलवार दोपहर तक नहीं जागे तो पहाड़ी के ठीक नीचे बसे गुफा महादेव और कृष्णापुर क्षेत्र के लोगों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित लोगों ने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एनएच जाम कर दिया। एसडीएम नवाजिश खलिक के मौके पर पहुंचने और लोगों को सुरक्षा का आश्वासन देने के बाद लोगों ने आधे घंटे बाद जाम खोला।
नगर के संवेदनशील बलियानाला के समीप सिपाहीधारा से वीरभट्टी के लिंक मार्ग के ठीक ऊपर स्थित चट्टान से बड़ा बोल्डर टूटा गिर गया। इस पर 24 परिवारों ने गुफा महादेव, धर्मशाला, जीआईसी समेत अपने रिश्तेदारों के वहां शरण ली। मंगलवार सुबह क्षेत्रवासी फिर मौके पर पहुंचे। सिंचाई और राजस्व अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर लोग भड़क गए। सुबह 11 बजे लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू की। दोपहर लगभग 12 बजे वह नारेबाजी करते हुए नैनीताल-हल्द्वानी मार्ग पर जीआईसी के समीप पहुंचे और जाम लगा दिया। सूचना पर एसडीएम नवाजिश खलिक भी मौके पर पहुंचे। जनता की मांग के क्रम में उन्होंने लोगों को चट्टान का ट्रीटमेंट करने, आवासीय क्षेत्र की सुरक्षा और क्षेत्रवासियों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने का आश्वासन दिया। लगभग आधा घंटे बाद लोगों ने जाम खोला जिससे आवागमन सुचारु हो सका। इसके बाद एसडीएम ने मौके पर जाकर भी क्षेत्रवासियों से वार्ता की। क्षेत्रवासियों की समस्या के निस्तारण का आश्वासन भी दिया। मौके पर संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दिए।
दस दिन में होगी प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा
एडीएम नवाजिश खलिक ने बताया कि पहाड़ी के ट्रीटमेंट के लिए सिचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। इस कार्य में समय लगेगा, हालांकि दस दिनों में संवेदनशील चट्टान से प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा के लिए लोहे की जाली एवं ग्रिल आदि लगा दी जाएंगी। प्रभावित क्षेत्र के समीप से सिपाहीधारा को जाने वाले वैकल्पिक मार्ग की सफाई आदि कर उसे दुरुस्त किया जाएगा। लोगों के सुझाव के क्रम में वीरभट्टी मार्ग से एक अन्य वैकल्पिक मार्ग का भी सुरक्षित जीआईसी मार्ग से मिलान किया जाएगा। क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि प्रभावित परिवारों को राशन बांटा गया।
30 वर्षों से 30 फीट चट्टान का स्थायी ट्रीटमेंट नहीं
बलियानाले से लगे सिपाहीधारा के पास स्थित पहाड़ी पर लगभग 30 फीट की संवेदनशील चट्टान का पिछले 30 वर्षों से स्थायी उपचार नहीं हो पाया है। इसके कारण दो दर्जन से अधिक परिवार असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। 19 जून 1996 को इसी चट्टान से गिरे पत्थर से एक नेपाली मजदूर की मौत हो गई थी। क्षेत्रवासियों के पत्राचार के बाद आंशिक सुरक्षा उपाय किए गए थे लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। सिंचाई विभाग ने लोहे के जाल लगाकर आंशिक ट्रीटमेंट किया जिससे एक विशाल बोल्डर आबादी क्षेत्र में जाने से रुक गया। हालांकि, यह समाधान स्थायी नहीं है और लोग लगातार स्थायी उपचार की मांग कर रहे हैं।
बलियानाला का क्षेत्र शुरुआत से ही संवेदनशील है। इससे लगे कृष्णापुर, सिपाहीधारा आदि में स्थित पहाड़ भी कमजोर हैं। यहां कई फॉल्ट भी हैं जिनसे पानी की धाराएं भी निकलती है। ऐसे में बलियानाला के साथ भविष्य में समीप की संवेदनशील पहाड़ियों को चिह्नित कर ट्रीटमेंट करना होगा।- चारूसी पंत, भू वैज्ञानिक