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पीडीएफ कोटे से मंत्री हरीश चंद दुर्गापाल

Sun, 08 Jan 2017 01:05 AM IST
राजेश नेगी/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी/लालकुआं।
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हल्द्वानी/लालकुआं। लालकुआं विधानसभा की बात करें, तो पीडीएफ कोटे से मंत्री हरीश चंद दुर्गापाल की मेहरबानी  की बारिश डेयरी और बिंदुखत्ता पर जमकर हुई। बरेली रोड जैसे इलाके तुलनात्मक तौर पर इनायतों का इंतजार करते ही रह गए। पांच साल तक कांग्रेसियों ने पीडीएफ को लेकर मोर्चा खोला। अभी भी टिकट को लेकर भारी विरोध है।
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पांच साल पहले जब दुर्गापाल निर्दलीय मैदान में उतरे थे, तो सहानुभूति की लहर थी, जिसने उनकी बाल्टी को वोटों से जमकर भर दिया। बाद में वह पीडीएफ कोटे से मंत्री भी बन गए। लेकिन, उनका फोकस 44 हजार वोटर वाले बिंदुखत्ता के इलाके में ज्यादा रहा है। इसके बाद अगर मेहरबानी रही, तो 22 से 23 हजार वोटर वाले गौलापार, चोरगलिया का इलाका है। कहा जाता है इन इलाकों को मजबूत करने के पीछे अपने चुनावी दुर्ग को सुरक्षित करना था।

इस दुर्ग को मजबूत करने के चक्कर में मंत्री जी अपने पिछले चुनाव का वादा ही भूल गए। उन्होंने वादा किया था कि लालकुआं क्षेत्र में मिनी स्टेडियम बनवाएंगे, यह नहीं बन सका। उसका अब शिलान्यास हुआ है। वर्ग-4 भूमि के मामले में लोगों को अभी तक मालिकाना हक नहीं मिल सका। उत्साह में बिंदुखत्ता को पालिका घोषित कराया, जब विरोध शुरू हुआ तो पालिका बनाने का आदेश वापस करा दिया।
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जबकि लालकुआं के लोगों को उम्मीद थी कि आबादी, इलाके की दृष्टि से लालकुआं नगर पंचायत (अनुमान 14 हजार वोटर हैं) को पालिका घोषित कराया जाएगा। जो अभी तक सात वार्ड तक सिमट हुआ है। इसी तरह बरेली रोड (अनुमान 12 से 13 हजार वोटर) के लोगों का अधिकांश समय बस इंतजार में ही गुजर गया, शायद वोट कम होना भी तरजीह न मिलना एक कारण रहा हो। अगर जनता के पक्ष से देखा जाए, तो उनकी विधानसभा में बिजली, पानी, सड़क से लेकर अपराध नियंत्रण की दृष्टि से बेहतर रहा है। 
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