पीडीएफ के खिलाफ मंथन शिविर में भी नेताओं ने मोर्चा खोला। जसपुर विधायक डा. शैलेंद्र मोहन सिंघल ने कहा कि ऊधमसिंह नगर जिले में नौ विधानसभाएं और वहां का प्रभारी मंत्री का जिम्मा पीडीएफ कोटे से मंत्री एमपी नैथानी को दिया गया है। सबसे अधिक विधानसभा वाले जिले में कांग्रेस हाशिए पर आ गई और उन्होंने अपनी टीम खड़ी कर ली है। कार्यकर्ताओं की न तो मंत्री सुन रहे हैं और न ही अधिकारी। उन्होंने कहा कि प्रभारी मंत्री का जिम्मा कांग्रेस कोटे के किसी मंत्री को दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मंत्रियों को घर के बाहर निकलकर क्षेत्र का दौरा करना चाहिए। मंत्री सुस्त पड़ गए हैं और कार्यकर्ता पस्त हो रहा है। डा. सिंघल ने कहा कि प्रदेश में सुनियोजित विकास नहीं हो रहा है। दैवीय आपदा और एससी-एसटी योजनाओं के मद में आने वाली धनराशि भी समय पर नहीं मिल पा रही है। सरकार में प्रभावशाली लोगों की सुनी जा रही है। मंत्रियों का कद देखकर विकास कार्यों पर मुहर लग रही है।
2017 में जवाब देना पड़ेगा भारी
मंथन शिविर के दौरान विधायक सिंघल ने कहा कि लगातार घोषणाएं की जा रही हैं लेकिन वे पूरी कैसे होंगी, इस पर विचार नहीं हो रहा है। 10 करोड़ रुपए की सड़क के लिए 10 हजार रुपए टोकन मनी दी जा रही है और फिर मामला ठंडे बस्ते में। लगातार हो रही घोषणाएं अगर पूरी नहीं हुईं तो 2017 में जनता को जवाब देना भारी पड़ेगा।
सरकार नहीं प्रदेश में एक गुट कर रहा काम
प्रदेश में सरकार नहीं बल्कि एक गुट काम कर रहा है। विधायक सिंघल ने मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके गुट के लोगों की ही अधिकारी सुन रहे हैं। अपनी ही सरकार में कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
खनन के लिए छलनी की जा रहीं नदियां
विधायक सिंघल ने कहा कि प्रदेश में नदियों से खनन करने की होड़ लगी हुई है। मानकों को दरकिनार कर नदियों का सीना चीरा जा रहा है लेकिन शासन मौन है। नदियों में लूट-खसोट करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।