हल्द्वानी। वर्षों से नजूल की जमीन पर बसे शहरवासियों के लिए खुशखबरी है। काठगोदाम से लेकर हल्द्वानी खास तक नजूल भूमि पर बसे 20-22 हजार परिवारों को जमीन का मालिकाना हक मिलने की उम्मीद जगी है।
नगर निगम के अभिलेखों में 394.61 हेक्टेयर से अधिक भूमि नजूल में दर्ज है। वर्ष 2022 की रिपोर्ट में डेढ़ लाख से अधिक आबादी के नजूल भूमि पर बसे होने का अनुमान लगाया गया था तब करीब 100 हेक्टेयर जमीन फ्रीहोल्ड होने के आंकड़े भी सामने आए थे। वर्तमान में इस नजूल भूमि पर 20-20 हजार भवन बन चुके हैं।
रविवार को चंपावत में हुई धामी सरकार की कैबिनेट की बैठक में नजूल भूमि के नियमितीकरण अभियान चलाने के लिए हुए फैसले से शहर की बड़ी आबादी को राहत मिली है। इसका सबसे अधिक फायदा उन लोगों को मिलेगा जिनके पास जमीन का कब्जा या पट्टा तो है लेकिन मालिकाना हक नहीं।
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खाम वालों को भी राहत
कैबिनेट के फैसले में नजूल के साथ ही खाम की भूमि को भी नियमितीकरण के दायरे में लाया गया है। इससे मंडलायुक्त के कैंप कार्यालय और उसके आसपास की खाम की जमीन पर बनी 50 से अधिक दुकानों पर काबिज व्यापारियों को भी राहत मिलेगी। रिटायर्ड अधिशासी अधिकारी गणेश सुयाल कहते हैं कि ऐसी जमीनों को फ्रीहोल्ड कराकर सरकार को राजस्व भी मिलेगा।
यह इलाके नजूल में है शामिल-
काठगोदाम, नई बस्ती, दुर्गा कॉलोनी, कुल्यालपुरा, जगदंबानगर, आवास विकास, वेलेजली लॉज, राजपुरा, सदर बाजार, बद्रीपुरा, कारखाना बाजार, नया बाजार, मंगलपड़ाव, साहूकारा लाइन, पटेल चौक, भवानीगंज, इंदिरानगर, बनभूलपुरा लाइन नंबर 1 से 17, राजेंद्र नगर, भोटियापड़ाव, शीशमहल आदि।
मालिकाना हक मिलने के बाद यह फायदे होंगे-
1.जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण का रास्ता साफ होगा।
2. संपत्ति का वैध हस्तांतरण आसान होगा।
3. भवन का नक्शा स्वीकृत कराने में जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी बड़ी बाधा दूर होगी।
4. संपत्ति के आधार पर बैंक ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं का रास्ता खुल सकता है।
5. वर्षों से लंबित नजूल फाइलों का निस्तारण हो सकेगा।
6. नजूल भूमि के फ्रीहोल्ड होने के बाद नक्शा पास और बैंक लोन जैसी सुविधा मिल सकेगी।
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नगर निगम की होगी मशक्कत
इस फैसले का असर सिर्फ मकान मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा। हल्द्वानी नगर निगम भी नजूल भूमि का प्रबंधन करने वाली प्रमुख संस्था रहा है। इसलिए अभियान शुरू होने पर निगम के नजूल अनुभाग में वर्षों से लंबित फाइलों की छंटाई, अभिलेखों की जांच, भूमि की पैमाइश और पात्रता परीक्षण बढ़ सकता है। निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि कौन-सी जमीन किस श्रेणी में है और उस पर किसका वैध अधिकार है। पुराने रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर भी बड़ी समस्या बन सकता है।
उत्तराखंड कैबिनेट में नजूल भूमि संबंधी लिए गए निर्णय की जानकारी तो मिली है लेकिन लिखित आदेश देर शाम तक प्राप्त नहीं हुआ था। शासन के निर्देश के बाद ही इस मामले में अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - परितोष वर्मा, नगर आयुक्त