कालाढूंगी सीट पर इस बार भी प्रमुख लड़ाके 2012 वाले ही हैं, लेकिन तैयारी और तेवरों में बदलाव है। बगावत और नाराजगी की चोट भी नए तरह से हो रही है।
निवर्तमान विधायक बंशीधर भगत, कांग्रेस के प्रकाश जोशी और निर्दलीय महेश शर्मा की त्रिकोणीय लड़ाई में भाजपा, कांग्रेस के बागियों और बसपा के युवा प्रत्याशी के एक ही बिरादरी से होने के कारण इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने जा रहे ठाकुर मतदाता के मन की थाह पाना खासा कठिन हो गया है।
कालाढूंगी विधानसभा में 1,48,445 मतदाता है। पिछले चुनाव में कांग्रेस से प्रकाश जोशी अचानक मैदान में कूदे। महेश शर्मा कांग्रेस छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़े। इससे कांग्रेस का वोट आपस में बंट गया और भाजपा के बंशीधर भगत के सिर ताज सज गया।
बसपा के स्थानीय प्रत्याशी दीवान सिंह और भूपेंद्र सिंह ने भी वोट काटने का काम किया। दीवान सिंह अब भाजपा तो भाई जी कांग्रेस के साथ खड़े हैं। भाजपा विधायक बंशीधर भगत से लोग संतुष्ठ नहीं हैं लेकिन युवाओं में मोदी के लिए आकर्षण दिख रहा है।
महेश शर्मा ने पिछले पांच साल में जनाधार बढ़ाने की लगातार कोशिश की है। हारने के बावजूद क्षेत्र नहीं छोड़ा। अपने कमजोर गढ़ को मजबूत किया है। कांग्रेस के प्रकाश जोशी ने बाहरी प्रत्याशी होने के ठप्पे को मिटाने के साथ ही इस बार स्थानीय स्तर पर टीम खड़ी की। पिछले चुनाव में उनके साथ भितरघात करने वाले इस बार जोशी के साथ खड़े हैं।
कालाढूंगी विधानसभा में करीब 71 हजार ठाकुर, 30 हजार ब्राह्मण, 22 दलित (एससी/एसटी/ओबीसी), पांच हजार अल्पसंख्यक, नौ हजार में अन्य, 53 सौ व्यापारी और दो हजार पूर्वांचल के मतदाता हैं। ठाकुर वोटर निर्णायक की भूमिका में है।
भाजपा के बागी हरेंद्र दरम्वाल, बसपा से वरुण प्रताप सिंह भाकुनी, जिला पंचायत सदस्य महेंद्र कुमार चौधरी और सुरेंद्र सिंह निगल्टिया ठाकुर प्रत्याशी हैं। इनमें ठाकुर वोट बंटने की संभावना है। दरम्वाल को हल्द्वानी तो चौधरी को कोटाबाग से वोट मिलने की संभावना है। दरम्वाल भाजपा तो चौधरी कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मतदाताओं का मानना है कि जोशी की संगठन में मजबूत पकड़ है। प्रदेश में कांग्रेस आई तो जोशी विधायक बनकर विकास करा सकते हैं। भाजपा की सरकार बनती है तो बतौर विधायक बंशीधर भगत केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने से विकास करा सके हैं। शर्मा निर्दलीय हैं। शर्मा जीतते हैं तो उनके लिए सभी विकल्प खुले होंगे।