नैनीताल। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) और कालागढ़ वन प्रभाग में करीब छह हजार पेड़ों के अवैध कटान व अवैध निर्माण से जुड़े मामले में तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत सहित राज्य के अन्य शीर्ष अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य की अन्य जांच एजेंसियों से सीबीआई जांच में सहयोग करने के लिए कहा है। कोर्ट ने आदेश की एक प्रति निदेशक सीबीआई को भी भेजने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई। देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अनु पंत ने वर्ष 2021 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उससे पूर्व कोर्ट ने भी मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। संबंधित क्षेत्र में तब कितने पेड़ काटे गए थे, उसका विवरण कोर्ट के पास नहीं था। बाद में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने जांच के बाद बताया था कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व व कालागढ़ वन प्रभाग में छह हजार पेड़ों का कटान हुआ था। सर्वे के आधार पर यहां बगैर अनुमति अवैध रूप से निर्माण किए जाने की जानकारी भी उजागर हुई। कुछ अन्य रिपोर्ट्स में मामले में तत्कालीन वन मंत्री डॉ, हरक सिंह रावत की कथित रूप से संलिप्तता भी सामने आई। इसके अलावा डीजी फॉरेस्ट की रिपोर्ट में भी शासन के शीर्ष अधिकारियों की भी भूमिका पाई गई और प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग और मनमानी की भी बात कही गई। इस दौरान कोर्ट ने सरकार से इस मामले की जांच रिपोर्ट मांगी लेकिन सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य की विजिलेंस टीम जांच कर रही है, लिहाजा इस मामले में और कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने कोर्ट में मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए इसकी सीबीआई जांच की मांग की थी। पक्षों को सुनने बाद बुधवार को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश जारी कर दिए।
सरकार का रवैया रहा ढुलमुल, कोर्ट को नहीं दी जानकारी
नैनीताल। याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई के दौरान कहा गया कि कोर्ट ने एक वर्ष पूर्व ही पेड़ों के अवैध कटान के बारे में मुख्य सचिव को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जबकि वहां छह हजार पेड़ काट दिए गए और अभी तक पांच जांचें भी हो चुकी हैं लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में कहा गया कि पेड़ों के कटान के अलावा वहां अवैध निर्माण भी अधिकारियों की शह पर हुए। पूर्व में मुख्य सचिव ने अपने शपथपत्र में कहा था कि वह समय- समय पर उच्च न्यायालय को कार्र्वाई के बारे में अवगत कराते रहेंगे परंतु एक वर्ष बाद भी उनकी ओर से किसी भी तथ्य के बारे में न्यायालय को अवगत नहीं कराया गया। विभागाध्यक्ष द्वारा गठित जोशी कमेटी के अनुसार कई अफसरों को जिम्मेदार ठहराया गया है, लेकिन इन शीर्ष अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी हुई अवहेलना
नैनीताल। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक भी वृक्ष नहीं काटा जा सकता और ना ही कोई निर्माण कार्य किया जा सकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय की भी खुली अवहेलना हुई है।