प्रधानमंत्री के जेनेरिक दवाओं के ड्रीम प्रोजेक्ट का मेडिकल कॉलेज प्रशासन मखौल उड़ा रहा है। एक ओर राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने जेनेरिक दवा लिखने का फरमान डॉक्टरों के लिए जारी किया है तो दूसरी ओर एक पीजी बेस कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए दवा सप्लाई करने का कांट्रेक्ट रिन्यू किया जा रहा है।
सितंबर 2015 में शताक्षी मेडिकोज को टेंडर मिला था। टेंडर भी विवादों के घेरे मेें रहा था। टेंडर की शर्त के अनुसार रिटेल का ड्रग लाइसेंस होना चाहिए था लेकिन लाइसेंस होलसेल का था। टेंडर के एक माह बाद रिटेल का लाइसेंस पेश किया गया था।
एक वर्ष बाद सितंबर 2016 में शताक्षी मेडिकोज टेंडर समाप्त हो गया था। टेंडर समाप्त होने के बाद नए टेंडर नहीं कराए गए बल्कि फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए अक्तूबर 2016 में तीन महीने के लिए टेंडर बढ़ा दिया गया।
मेडिकोज पर दोबारा अनुकंपा की गई और फरवरी 2017 में तीन माह के लिए टेंडर रिन्यू कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो अब सितंबर 2017 तक टेंडर रिन्यू करने की तैयारी चल रही है। जबकि मार्च 2017 में जेनेरिक दवाओं को लेकर आदेश आ चुका है।
राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा एक ओर तो डाक्टरों को आदेश निकाल कर नसीहत दे रहे हैं कि जेनेरिक दवाएं लिखी जाएं तो दूसरी ओर किसी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर रिन्यू किया जा रहा है। सवाल ये उठता प्रधानमंत्री की मरीजों को सस्ती दवाओं के ड्रीम प्रोजेक्ट को हवा में उड़ाने के पीछे कौन लोग हैं। किसी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर क्यों रिन्यू किए जा रहे हैं।
दवाओं की कमी है और जेनेरिक दवाओं की पूरी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में टेंडर को रिन्यू किया जा रहा है।
डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कालेज
नियम के तहत दोबारा टेंडर कराने चाहिए थे। ये मामला गंभीर है और चिकित्सा-शिक्षा निदेशक एवं प्राचार्य से जवाब-तलब किया जाएगा कि किन परिस्थितियों में टेंडर नहीं कराए गए। शीघ्र ही टेंडर कराए जाएंगे और रिन्यूअल को निरस्त कराया जाएगा।
डी सैंथिल पांडियन, चिकित्सा-शिक्षा सचिव/मंडलायुक्त
करार के पैरा नंबर 16 में लिखा है आपसी सहमति के आधार पर दो वर्ष का टेंडर बढ़ाया जा सकता है। टेंडर क्यों तीन-तीन माह का बढ़ाया जा रहा है इसका जवाब तो मेडिकल कालेज प्रशासन ही दे सकता है।
रवि गुप्ता, शतीक्षी मेडिकोज स्वामी