कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए ऑनलाइन प्रवेश का पोर्टल दूसरे दिन ही जवाब दे गया। ऑनलाइन प्रवेश को आवेदन करने के लिए वेबसाइट पर दिए गए लिंक को खोलने पर सर्वर डाउन मिला। उसमें अंडर मैंटिनेंस का मेसेज आता रहा। इस कारण विद्यार्थी काफी परेशान रहे।
वहीं, विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया हिंदी माध्यम से इंटरमीडिएट करने वाले विद्यार्थियों के साथ मजाक जैसा बन गया है क्योंकि पोर्टल पर पूरी जानकारी एवं आवेदन फार्म अंग्रेजी में दिया गया है।
कुविवि ने इस सत्र से ऑनलाइन प्रवेश करने को बृहस्पतिवार को ही एडमिनेशन पोर्टल का शुभारंभ किया था। एडमिशन पोर्टल ने शुक्रवार को पूरे दिन विद्यार्थियों को खूब परेशान किया। दूर दराज से हल्द्वानी के साइबर कैफे में ऑनलाइन प्रवेश के लिए आए विद्यार्थी आवेदन फार्म भरने की कोशिश करते रहे।
विद्यार्थियों के मुताबिक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर दिए गए लिंक को खोलने पर सर्वर डाउन एवं अंडर मैंटिनेंस का मैसेज आ रहा था। विश्वविद्यालय द्वारा बताया गया दूसरा वेब एड्रेस तो लांचिग के समय से बंद मिलता रहा। बाद में शाम 7:30 बजे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर दिए गए लिंक ने पुन: काम करना शुरू किया।
उत्तराखंड बोर्ड से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण कर स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए यह ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया सिरदर्द बनने लगी है। हिंदी मीडियम स्कूल से इंटर पास करने वाले जिस विद्यार्थी को अंग्रेजी नहीं आती वे पोर्टल पर आवेदन फार्म ही नहीं भर पा रहा है।
इसकी वजह यह कि विश्वविद्यालय ने पोर्टल पर आवेदन फार्म से लेकर सारी जानकारी अंग्रेजी में ही दी है उसमें हिंदी का विकल्प नहीं दिया गया है। ऐसे में विद्यार्थियों को आवेदन पत्र भरने के लिए साइबर कैफे चलाने वालों पर निर्भर रहना होगा। ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र भरने के लिए शहर के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
विद्यार्थियों का कहना है कि महाविद्यालय परिसर के अंदर ऑनलाइन प्रवेश फार्म भरने की सुविधा मिलनी चाहिए थी लेकिन अधिकांश महाविद्यालयों में इंटरनेट कनेक्शन होना तो दूर काम करने के लिए कंप्यूटर की व्यवस्था तक नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया को अगर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता तो ज्यादा बेहतर होता।
पहले चरण में प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों को, दूसरे चरण में विश्वविद्यालय के तीनों परिसरों को तथा अंतिम चरण में राजकीय महाविद्यालयों को सम्मिलित किया जाना चाहिए था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने आनन-फानन में आधी अधूरी तैयारी के बीच इसे लागू कर दिया। इस संबंध में कुमाऊं विश्वविद्यालय के ऑनलाइन एडमिशन पोर्टल प्रभारी प्रो. एमएस राणा से बात करने की कोशिश की गई मगर उनका फोन नॉट रिचेबल था।