जमरानी में खनन की हायतौबा ने शुक्रवार को एक और जान ले ली। इसी साल जनवरी में जमरानी क्षेत्र में एक डंपर से कुचल कर बच्चे की मौत के बाद से ही यहां खनन बंद था। गांव के लोगों का साफ कहना था कि जमरानी में किसी भी कीमत पर खनन नहीं होना चाहिए।
अब तक का खनन जमरानी का पूरा सीना चाक कर चुका है। जमरानी में खनन हल्द्वानी की पानी सप्लाई की लाइफ लाइन गौला की सेहत के लिए भी खतरनाक बताया जा रहा है। इसके बाद भी हाल यह है कि जमरानी में रिवर ट्रेनिंग के नाम पर खनन का पट्टा आवंटित कर दिया गया।
गौला का ही हाल बता रहा है कि खनन में नियम और कायदे-कानूनों को ताक पर रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती। जमरानी का भी यही हाल है। खनन पट्टों के नाम पर जमरानी को अब तक जमकर खोदा गया है। हाल यह है कि पूरी नदी कई स्थानों पर पाइपों के बीच से होकर बह रही है।
नदी की धारा को ही मोड़ दिया गया है। एक बार इस नदी में खनन शुरू होता है तो अधिक से अधिक आरबीएम निकालने की होड़ भी शुरू हो जाती है। इसी होड़ का नतीजा था कि कुछ समय पहले एक बच्चा डंपर से कुचल कर मौत की नींद सो गया था।
कहां रखा गया कानून को ताक पर
जो डंपर पलटा वह अंधेरे में आ रहा था। घटना करीब सात बजे की आस पास की है। खनन का साफ नियम है कि सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद गाड़ी नहीं निकलेगी।
डंपर के पलटने से मरने वाला भी करीब 14-15 साल का किशोर है। जाहिर है कि यहां बालिग और नाबालिग का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
इस किशोर के साथ इसका भाई और बहन भी थी।