केमू संस्था का चंपावत स्टेशन बंदी के कगार पर पहुंच गया है। केमू प्रबंधन ने इस मार्ग पर घाटा दिखाते हुए हल्द्वानी से चंपावत के लिए अपनी बस सेवाएं बंद कर दी हैं।
किसी जमाने में एशिया की नंबर एक बस सेवा रही केमू संस्था की इस समय आर्थिक स्थिति खस्ता है। संस्था पर 100 से अधिक कर्मचारियों का कई सालों का वेतन और पीएफ समेत करीब चार करोड़ की देनदारी है।
सरकार का अपेक्षित सहयोग न मिलने और कुप्रबंधन के चलते केमू संस्था ने हल्द्वानी से वाया देवीधुरा दोनों बस सेवाएं भी बंद कर दी हैं। केमू के अधिशासी निदेशक महेश बिष्ट ने बताया कि हल्द्वानी से वाया देवीधुरा चंपावत के लिए अवैध रूप से मैक्सी कैब वाहनों के संचालन के चलते दोनों पुरानी बस सेवाओं को मजबूरी मेें बंद करना पड़ा है।
दोनों बसें सुबह क्रमश: छह व साढ़े छह बजे चंपावत के लिए संचालित होती थीं। परिवहन विभाग और प्रशासन इन अवैध संचालित वाहनों पर कार्रवाई नहीं कर रहा। इस कारण केमू को इस मार्ग पर पर्याप्त सवारियां नहीं मिल रही थीं।
उन्होंने कहा कि दोनों बस सेवाएं बंद होने से चंपावत स्टेशन बंदी कगार पर पहुंच गया है, हालांकि कर्मचारी स्टेशन का कार्यालय खोल रहे हैं। अब चंपावत के लिए रामनगर जोन की सिर्फ केमू बस रानीखेत से सुबह सात बजे चंपावत के लिए चलती है, चंपावत से भी सुबह सात बजे संचालित होती है।
उन्होंने कहा कि चंपावत के लिए हल्द्वानी से बसों के संचालन में सहयोग के कुमाऊं कमिश्नर को पत्र लिखकर मांग की गई है। उन्होंने कहा कि जून में यदि यात्री मिले तो चंपावत के लिए एक बस सेवा को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
टनकपुर स्टेशन हो चुका है बंद
कुमाऊं का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले टनकपुर में केमू का स्टेशन 70 के दशक में ही बंद हो चुका है। केमू संस्था के सचिव ऐलन रे ने बताया कि किसी समय टनकपुर से पिथौरागढ़ तक केमू की बसों के लिए यात्रियों में मारामारी की नौबत आ जाती थी।
टनकपुर में केमू के दो स्टेशन खोलने पड़े थे और 30 से अधिक बसें इस मार्ग पर चलती थीं, लेकिन बाद में रोडवेज बसों का संचालन बढ़ने से केमू स्टेशन बंद करना पड़ा। उन्होंने बताया कि शासन से टनकपुर से पिथौरागढ़ के लिए केमू को दोबारा परमिट देने की मांग की है।
इन स्टेशनों की स्थिति बेहतर नहीं
पिथौरागढ़
हल्द्वानी
रामनगर
बागेश्वर
अल्मोड़ा
रानीखेत