टेंडर नाम की लूट है लूट सके तो लूट। स्वास्थ्य विभाग में इस तर्ज पर काम चल रहा है। लाखों रुपये के टेंडरों की बंदरबांट की गई। मानकों को ताख पर रखकर टेंडर चहेतों के हाथ पर रख दिया गया। सवाल ये उठता है एक ठेकेदार इतना प्रभावशाली कैसे हो सकता है कि सभी टेंडर उसकी को दिए गए।
बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल में लघु निर्माण एवं भवन मरम्मत के लिए 18.12.15 को निविदा आमंत्रित की गई थी। टेंडर में पांच लोगों ने प्रतिभाग किया। मगर महकमे की मेहरबानी एक ठेकेदार पर सबसे अधिक बरसी।
मार्च 16 से लेकर अप्रैल 16 तक एक ही ठेकेदार को टुकड़ों में 75 लाख रुपये से अधिक का काम दिया गया। हालांकि विभाग ने एक अन्य ठेकेदार को भी दो टेंडर दिए। मानकों के तहत 10 लाख से अधिक का टेंडर होने पर पूरा काम लोक निर्माण विभाग को देना पड़ता है।
चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए लगभग 01 लाख 90 हजार से लेकर 08 लाख 25 हजार रुपये तक के ही टेंडर दिए गए। खास बात ये रही है कि टेंडर में शब्दों में राशि अंकित नहीं की गई। टेंडर में कटिंग भी की गई।
सवाल ये उठता है कि टेंडर में शब्दों में राशि न लिखे जाने के बावजूद एक ही व्यक्ति को टेंडर क्यों दिया गया। मानक न पूरा करने पर टेंडर निरस्त क्यों नहीं किया गया। मामले का खुलासा सूचना अधिकार के तहत ट्रेवस मासी द्वारा मांगी गई जानकारी में हुआ है।
मामले की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन स्तर से मामले की जांच दोबारा कराई जा रही है। मामले में अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही होना है।
- डा. गीता शर्मा, अपर निदेशक स्वास्थ्य कुमाऊं
दो ठेकेदारों के रेट कम थे इसलिए दोनों को टेंडर दिया गया। टेंडर में किसी भी नियम की अनदेखी नहीं की गई है। मामले की जांच मुख्य विकास अधिकारी कर रहे हैं और सारे प्रपत्र उनको उपलब्ध करा दिए गए हैं। ठेकेदारों की आपसी लड़ाई में अधिकारियों को परेशान किया जा रहा है।
- तारा आर्या, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, बीडी पांडे हास्पिटल