अंग्रेजों के जमाने में बनी नगर पालिका परिषद अफसरों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। पालिका का कामकाज तो प्रभावित हो ही रहा है लोगों के काम भी नहीं हो पा रहे हैं। जैसे-तैसे जुगाड़ से कामकाज निपटाया जा रहा है।
कई सरकारें आईं और गईं मगर किसी ने नगर पालिका के दर्द को समझने की कोशिश नहीं की। जनप्रतिनिधि भी आश्वासन की घुट्टी पिलाते रहे। हाल यह है कि कार्यालय अधीक्षक जैसा महत्वपूर्ण पद आठ साल से खाली है। सहायक अभियंता के पद पर भी 2014 से नियुक्ति नहीं हुई है।
अवर अभियंता का पद एक साल और प्रशासनिक अधिकारी का पद दो साल से खाली पड़ा है। प्रधान सहायक और वरिष्ठ सहायक के पदों पर भी दो साल से जबकि लेखाकार व सहायक लेखाकार के पद पर चार सालों से कोई काबिज नहीं है।
यही हाल मुख्य सफाई निरीक्षक का भी है। गनीमत यह है कि सफाई निरीक्षक के सृजित दो पदों से एक भरा है। दूसरी ओर कर और राजस्व निरीक्षक के दो पदों में से एक पद छह साल से खाली पड़ा है। मानचित्रकार केएन जोशी के रिटायर होने होने से 31 मार्च से यह पद भी खाली है।
ये है हाल
पद कब से खाली
कार्यालय अधीक्षक आठ साल
सहायक अभियंता दो साल
अवर अभियंता एक साल
प्रशासनिक अधिकारी दो साल
प्रधान सहायक दो साल
वरिष्ठ सहायक दो साल
लेखाकार चार साल
सहायक लेखाकार चार साल
सफाई निरीक्षक छह साल
मानचित्रकार दो महीने
केंद्रीयकृत सेवाओं के पदों के खाली रहने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। लेखा सलाहकार के रूप में स्थानीय स्तर पर सुरेश चौधरी की तैनाती की गई है। लोनिवि से पूरन सिंह रावत को जेई के तौर पर पालिका से संबद्ध किया गया है। रिक्त पदों को भरने के लिए शहरी विकास सचिव को लगातार पत्र भेजे हैं। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को भी इस बारे में बता दिया गया है।
-रोहिताश शर्मा, ईओ, नगर पालिका परिषद नैनीताल।