पेयजल लगातार दूषित होता जा रहा है और प्रशासन से लेकर जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। पानी के नमूने फेल होने पर विभाग क्लोरीन की मात्रा बढ़ाकर सैंपल को ठीक बता देता है और अपने गाल बजाने में लग जाता है। अब गरमपानी और कैंची के पास स्रोत के पानी का सैंपल भी फेल हो गया है।
पिछले साल स्वास्थ्य महकमे ने नदियों एवं स्रोतों के पानी का सैंपल लिया था। इन नमूनों की जांच कराई गई थी। खास बात ये थी कि रामनगर में कोसी नदी, गरमपानी में क्षिप्रा नदी के सैंपल फेल हो गए थे। इनमें जानवर का मलमूत्र मिला पाया गया और कई गंभीर बीमारियां होने का संदेह जताया गया था।
स्वास्थ्य विभाग ने गरमपानी और कैंची के पास स्रोत के पानी का सैंपल लिया था। सैंपल की जांच रिपोर्ट ने स्वास्थ्य महकमे के कान खड़े कर दिए हैं। स्रोत का पानी भी अब पीने योग्य नहीं बचा है। स्रोत के पानी में जानवरों एवं इंसानों का मलमूत्र मिला है।
जिला संक्रामक रोग विश्लेषक नंदन कांडपाल ने बताया कि स्रोत का दूषित पानी पीने से पीलिया हो सकता है। अधिक दिनों तक अगर इसका सेवन किया गया तो पीलिया बिगड़ने के कारण लीवर भी खराब हो सकता है। अब सवाल ये उठता है कि जांच रिपोर्ट को लेकर शासन-प्रशासन गंभीर होगा या इसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाएगा।
जीवनदायिनी नदियों एवं स्रोतों के पेयजल को दूषित करने से बचाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठता है अब ये देखना होगा।