रामनगर की कोसी नदी में अब कॉमन मेरगंजर (बतख) पक्षी का आगमन हो गया है। तालाबों और नदियों में रहने वाला यह पक्षी अधिक ठंड या तापमान के शून्य से नीचे चले जाने के कारण अक्तूबर अंतिम या नवंबर प्रथम सप्ताह में नार्थ अमेरिका, यूरोप और सेंट्रल एशिया से यहां पलायन करती है और फरवरी अंत तक वापस लौट जाती है।
वन्य जीव विशेषज्ञ दीप रजवार ने बताया यह बड़ी और लंबे शरीर वाली बतख है जिनके पंख पतले और नुकीले होते है और इनकी चोंच सीधी और संकीर्ण होती है जबकि फीमेल में सर के पिछले भाग में बालों का एक गुच्छा होता है जिसे क्रेस्ट बोलते हैं।
ये बहुत ही एकांतवासी है और हलकी सी भी आहट पर उड़ जाते है। मेल का शरीर चमचमाता हुआ सफेद और सर हरा तथा चोंच लाल होती है जबकि फीमेल का रंग ग्रे और चेस्ट सफेद रंग की होती है और सर भूरे रंग का होता है।
पानी के अंदर डुबकी मारकर मछलियों को शिकार करना इस पक्षी का शौक है वहीं यह कीड़े, घोंघे, मेंढक, छोटे स्तनधारी, पक्षी, पौधों को भी खाते है। ज्यादातर मीठे पानी नदियों और झीलों में पाया जाने वाला यह पक्षी नदी किनारे पेड़ों पर वुडपैकर द्वारा किए गए छेदों पर घोंसला बनाते है।
फीमेल प्रजनन के दौरान 6 से 17 अंडे देती है जिनको 26 से 35 दिनों तक सेकने के बाद बच्चे निकलते हैं। अभी तक सबसे पुरानी मेरगंजर का रिकॉर्ड 13 साल और 5 महीने का है। इस पक्षी को देखने के लिये पर्यटक भी पहुंचते हैं लेकिन यह आसानी से न दिखने वाला पक्षी है।