शौक और नशे के लिए कई लोग सिगरेट, गुटखा, पान, खैनी के आदी हो चुके हैं, अब वह इस आदत की गुलामी से छुटकारा चाहते हैं। कैंसर और दूसरी बीमारियों के खतरे के चलते लोग बड़ी संख्या में डाक्टरों के पास तंबाकू से छुटकारा पाने के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा बाजार में जैली (टेस्टाइल) और च्विंगम जैसे विकल्प आ गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनके परिणाम शानदार है। इस्तेमाल करने वाले 60 से 70 प्रतिशत लोग इसके कारण तंबाकू की आदत को छोड़ पा रहे हैं।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. मनोज त्रिवेदी कहते हैं कि प्रतिदिन ओपीडी में 20 से 25 तक ऐसे लोग आते हैं, जो नशा करते हैं और अब चाहते हैं कि तंबाकू/नशे की आदत छूट जाए। दवाओं के अलावा बाजार में जैली (टेस्टाइल) और च्विंगम के विकल्प आ गए हैं, जिनके परिणाम बेहतर हैं। एक अनुमान से 65 से 70 प्रतिशत लोग इन विकल्पों को आजमा रहे हैं, उनसे तंबाकू की आदत छूट रही है। सामान्य तौर पर लोग विज्ञापन आदि के चलते सीधे दुकानों से दवा खरीद लेते हैं। लेकिन, इनके यदि इसके इस्तेमाल करने से कोई फायदा नहीं होता है तो डॉक्टर संपर्क कर लेना चाहिए। अगर डॉक्टर के निर्देशन में दवा आदि को शुरू किया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। इन दवाओं की निश्चित डोज होती है, जो धीरे-धीरे कर बंद कर दी जाती है।
बढ़ गई डिमांड, जागरूकता का असर
हल्द्वानी। डॉ. त्रिवेदी कहते हैं कि तंबाकू छोड़ने की इच्छा के पीछे लोगों की जागरूकता और तंबाकू से होने वाले नुकसान को लेकर किया जा रहा प्रचार-प्रचार भी है। दवा विक्रेता प्रकाश पांडे बताते हैं कि यह खास तरह के च्विंगम एक महीने में लगभग 50 डिब्बे तक वह बेच रहे हैं। अन्य विक्रेता चमन लाल कपूर और सागर कहते हैं कि इसका अच्छा रिस्पांस है। जो एक बारे ले जाता है, वह दोबारा लेने आ रहा है।