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अब ओपीडी से आनेवाले रोगियों को दवा उपलब्ध कराने की तैयारी

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हल्द्वानी के बेस अस्पताल की ओपीडी में उमड़ी मरीजों की भीड़। संवाद
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हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज के अधीन सुशीला तिवारी अस्पताल से ओपीडी में आने वाले रोगियों को स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों की तरह दवा उपलब्ध कराने की योजना है। कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल में प्रतिदिन 1500 से 1800 तक रोगी आते हैं, इन रोगियों को डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद बाजार से दवा खरीदनी पड़ती है।
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स्वास्थ्य विभाग के बेस अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में ओपीडी में आने वाले रोगियों को निशुल्क दवा उपलब्ध कराई जाती है, पर यह व्यवस्था मेडिकल कॉलेज के अधीन सुशीला तिवारी अस्पताल में नहीं है। यहां पर इमरजेंसी, भर्ती मरीज और कुछ विभागों में ही निशुल्क दवा का वितरण किया जाता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। अब अस्पताल प्रबंधन ओपीडी में आने वाले रोगियों को दवाओं को उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है।
अलग-अलग विभागों में दवा वितरण के काउंटर
हल्द्वानी। अस्पताल प्रबंधन की दवा वितरण को लेकर बैठकें हो चुकी हैं। इसमें प्रारंभिक तौर पर विचार किया गया है कि कुछ विभागों में दवा वितरण काउंटर खोला जाएगा। इससे एक ही जगह पर भीड़ नहीं लगेगी। इन दवा वितरण केंद्र के लिए फार्मासिस्ट समेत अन्य कर्मियों की संख्या और उनकी व्यवस्था पर भी विचार किया गया है।
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कुछ दवाओं से शुरुआत
हल्द्वानी। दवा पर आने वाले खर्च भी मंथन हुआ है। अभी आईपीडी, इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को दवा उपलब्ध कराने पर ढाई करोड़ का खर्च आता है। हाल ही में हुई बैठकों में विचार किया गया कि शुरुआत में आमतौर ज्यादा इस्तेमाल होने वाली तीस से चालीस प्रकार दवाओं का वितरण किया जाएगा। इसके बाद आगे दवाओं की संख्या को बढ़ाया जाएगा। इन दवाओं के वितरण में एक साल में करीब सत्तर लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।
कोट
अभी इमरजेंसी, आईपीडी और कुछ विभागों में ही दवा वितरित की जा रही है। अब ओपीडी में आने वाले सभी रोगियों को दवा मिल सके, इस पर विचार चल रहा है। इसे लेकर बैठक भी हो चुकी है। सभी पहलू पर विचार किया गया है। दवा मिलने से रोगियों को राहत मिलेगी। - डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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