लालकुआं (नैनीताल)। ‘मेरे लाल अब तो आंखें खोलो, क्या यही वो दिन था, जिसके लिए तू ढेर सारे वादे करता था।’ जवान बेटे शिवांश के शव से लिपटकर मां गीतम बार-बार यह कह रही थीं। अभी कुछ दिन पहले ही शिवांश को पास होने पर हाई स्पीड बाइक मिली थी। इसके बदले शिवांश ने मां से तमाम वादे किए थे। मां को भी अपने होनहार बेटे पर फख्र था। उम्मीद थी कि उसका लाडला सपनों को साकार करेगा। मगर एक पल में सब कुछ बदल गया। कल तक जिस परिवार में अपार खुशियां थीं। आज वहां मातम पसरा हुआ है। मां-बाप की आंखों का तारा शिवांश अपने दोस्तों का भी चहेता था। उसका मिलनसार व्यक्तित्व हर किसी को आकर्षित करने वाला था। अपने जिगर के टुकडे़ को खोने बाद मां कुछ समय होश में आने के बाद बार-बार बेसुध हो रही थी तो पिता सुनील एकदम स्तब्ध और अवाक। उनकी आंखों से बहते आंसू इस दर्द को बयां कर रहे थे।
पोते की शादी में नांचने का ख्वाब रह गया अधूरा
लालकुआं (नैनीताल)। शिवांश अपनी बूढ़ी दादी का बेहद लाडला था। दादी की लोरियां सुनकर ही शिवांश सोया करता था। मां गीतम शिवांश को नटखट कहकर पुकारा करती थीं। पर रविवार को हुई घटना ने शर्मा परिवार को झकझोर कर रख दिया है। बूढ़ी दादी रोते हुए कहती हैं कि यही सब देखना था तो भगवान ने मुझे पहले क्यों नहीं उठा लिया। जिस पोते को सीने से लिपटाकर कई लोरियां सुनाई, जिसके लिए सुंदर बहू लाने और शादी में नाचने का ख्वाब देखा था, आज वहीं पोता अकेला छोड़कर चला गया। बूढ़ी दादी सुशीला देवी (68 वर्ष) के सामने से पोते की अर्थी निकली तो दादी ने इसे भगवान की बहुत बड़ी नाइंसाफी बताया।
हेलमेट पहनना जरूरी है मजबूरी नहीं
लालकुआं (नैनीताल)। शिवांश के अंतिम संस्कार में जो कोई भी पहुंचा, वह यही कह रहा था कि यदि शिवांश ने हेलमेट पहना होता तो उसकी जान बस सकती थी। लोगों को कहना था कि हेलमेट पहनना जरूरी है, यह कोई मजबूरी नहीं है। इसे बोझ समझकर न पहनें। घटना के समय शिवांश की हेलमेट बाइक में टंगी थी।
सैकड़ों लोगों ने दी शिवांश को अंतिम विदाई
लालकुआं (नैनीताल)। शिवांश के जाने का गम हर किसी को था। सेंचुरी कालोनी से निकली शिवांश की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल थे। सुनील शर्मा के छोटे बेटे दिवांश ने शिवांश को मुखाग्नि दी।