बाल सुधार गृह में प्रवास कर रहे बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने किशोर न्याय निधि का गठन किया है। किशोर न्याय निधि में 20 लाख रुपये दिए गए हैं। बच्चों को उत्तराखंड कौशल विकास समिति के माध्यम से रुचि के अनुसार प्रोफेशनल ट्रेनिंग कराई जाएगी।
बालिका निकेतन, शिशु निकतेन, बाल सुधार गृह समेत अन्य में प्रवास कर रहे शून्य से 18 वर्ष के आयु के बच्चों के पुनर्वास के लिए सरकार ने किशोर न्याय निधि का गठन किया है। किशोर न्याय निधि में 20 लाख रुपये जमा किए गए हैं। निधि में दान और चंदा भी लिया जाएगा।
निधि का प्रयोग घर जाने वाले बालक-बालिका के कारोबार करने के लिए किया जाएगा। अभी ये तय नहीं हुआ कि राशि कितनी दी जाएगी। ऐसे बच्चों की रुचि के अनुसार उत्तराखंड कौशल विकास समिति के सहयोग से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
संवासिनियों को भी समिति प्रशिक्षण देगी। समाज कल्याण निदेशक वीएस धानिक ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में लगभग 152 बच्चे बालिका निकेतन, शिशु निकेतन, बाल सुधार गृह आदि में हैं।
उन्होंने बताया कि 03 बालक-बालिका निकेतन, 02 शिशु निकेतन, सात आब्जर्वेशन होम और 03 एसबीएल होम को बड़े कारपोरेट घरानों से गोद लेने का अनुरोध किया गया है। बड़े कारपोरेट घराने मैदान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, खेल का मैदान समेत अन्य सहायता कर सकते हैं। 31 बड़े कारपोरेट घरानों को पत्र लिखा गया है।