नैनीताल और तमिलनाडु एक-एक अंक के साथ बढ़े आगे
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नैनी झील के रखरखाव का जिम्मा अब सिंचाई विभाग के पास होगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोनिवि से यह जिम्मेदारी हटाकर सिंचाई विभाग को दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कि वह खुद नैनी झील की मानिटरिंग करेंगे। जल्द झील का स्थलीय निरीक्षण कर वस्तुस्थिति का जायजा भी लेंगे।
अमर उजाला के संपादकीय पृष्ठ पर मैदान में बदलती नैनी झील शीर्षक से प्रकाशित स्टोरी का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने झील की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सीएम कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों से नैनी झील के पुनर्जीविकरण के संबंध में जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि झील को बचाए रखने के लिए किसी भी स्तर पर धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। इसके संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे और जरूरत पड़ी तो झील संरक्षण के लिए देशी तकनीक के साथ-साथ विदेशी तकनीक की भी मदद ली जाएगी।
उन्होंने भीमताल, सातताल और नौकुचियाताल समेत अन्य झीलों को भी बचाने और संवारने के लिए ठोस कदम उठाए जाने को कहा। मुख्यमंत्री ने सोमवार को ट्वीट कर नैनी झील से जुड़े गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए अमर उजाला का आभार भी जताया।
विधायक संजीव ने भी सीएम के सामने रखा था नैनी झील का मुद्दा
नैनीताल के विधायक संजीव आर्य ने बताया कि उन्होंने भी मुख्यमंत्री रावत के सामने नैनीझील के मुद्दे को प्रमुखता से रखा था और झील के गिरते जल स्तर के बारे में बताया था। विधायक का कहना है कि झील के रखरखाव का जिम्मा सिंचाई विभाग को सौंपे जाने से जल संसाधन मंत्रालय भारत सरकार से झील संरक्षण की दिशा में अतिरिक्त बजट उपलब्ध हो सकेगा।
उन्होंने झील का हाइड्रोजिकल सर्वे कराने की भी मांग भी की। कहा कि वह जल्द केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती से भी इस बारे में मुलाकात करेंगे।