एमबीपीजी कॉलेज से स्नातक करने वाले विद्यार्थियों के लिए खुशखबरी है। विद्यार्थियों को अगर हिंदी भाषा और अंग्रेजी भाषा के स्थान पर संस्कृत भाषा पढ़ने में रुचि हो तो वे अब इस विषय से स्नातक कर सकते हैं। कॉलेज में इस सत्र से संस्कृत भाषा विषय शुरू कर दिया गया है।
बीए प्रथम सेमेस्टर के तीन विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा और अंग्रेजी भाषा विषय छोड़कर संस्कृत भाषा ले लिया है। इस विषय की क्लासें भी शुरू हो गई हैं।
स्नातक प्रथम में एडमिशन लेने वाले छात्र-छात्राओं को हिंदी भाषा और अंग्रेजी भाषा विषय में एक विषय लेना अनिवार्य था। इस वजह से विद्यार्थियों को इनमें से एक भाषा विषय लेना पड़ता था।
इधर, राज्य सरकार द्वारा संस्कृत को राज्य की द्वितीय भाषा का दर्जा दिया है। लेकिन संस्कृत भाषा केवल संस्कृत महाविद्यालयों तक ही सिमट कर रह गई थी। एमबीपीजी कालेज में संस्कृत विभाग में पिछले वर्ष स्थानांतरित होकर आए डा. विजय विद्यालंकार ने संस्कृत भाषा को शुरू किए जाने की कोशिश की तो इसमें उन्हें सफलता भी मिल गई।
कुमाऊं विश्वविद्यालय ने भी संस्कृत भाषा विषय को चलाने की स्वीकृति दे दी है। अभी तक यह विषय कुमाऊं भर में केवल डीएसबी कैंपस कालेज नैनीताल के अलावा कहीं और नहीं पढ़ाया जाता था।
स्नातक प्रथम सेमेस्टर में बीए में यह विषय शुरू होने की जानकारी मिलने पर तीन विद्यार्थियों ने दूसरे भाषा विषय छोड़कर संस्कृत भाषा विषय ले लिया है। सोमवार को एक क्लास रूम में बैठे तीनों विद्यार्थी संस्कृत के प्रोफेसर डा. विद्यालंकार से पढ़ भी रहे थे।