बच्चों के नाम सोच समझकर रखें, क्योंकि जन्म प्रमाण पत्र में अब नाम परिवर्तन नहीं हो सकेगा। उत्तराखंड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशक ने सीएमओ और जिला रजिस्टार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
महानिदेशक के मुताबिक जन्म मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 की धारा 14 के तहत बच्चे के जन्म की अवधि से एक साल के बीच मुफ्त में पंजीकरण होता है। इसके बाद 15 साल की उम्र तक विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण कराया जाता है। महानिदेशक ने कहा कि आमतौर पर अभिभावक बच्चे के उपनाम से उनका जन्म पंजीकरण करा देते हैं। बाद में नाम परिवर्तन कर देते हैं, इससे रिकार्ड में काफी परेशानी होती है।
महानिदेशक ने कहा कि नवजात बच्चे का जन्म पंजीकरण के वक्त मुन्ना, मुन्नी, गुड़िया और पप्पू जैसे नाम कतई दर्ज नहीं होंगे। नाम की जगह रिक्त छोड़ी जाए। एक बार पंजीकरण के बाद नाम परिवर्तन संभव नहीं होगा। यदि बच्चे का नाम पंजीकरण स्कूल जाने के बाद हो रहा है तो स्कूल प्रबंधन से नाम सत्यापित कराया जाए। पंजीकरण के वक्त अभिभावकों से शपथ पत्र लिया जाए कि भविष्य में बच्चे का नाम परिवर्तन नहीं करेंगे।