करीब छह माह से फाइलों और मीटिंग का दौर चलने के बावजूद अब तक एथलेटिक्स स्टेडियम के लिए वन विभाग से जमीन नहीं मिल पा रही है। इससे अक्तूबर में स्टेडियम का निर्माण पूरा होने की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है। जबकि राज्य सरकार चाहती है कि चुनाव से पहले ही स्टेडियम का लोकार्पण कर दिया जाए।
गौलापार में बन रहा अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश और कांग्रेस सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। अक्तूबर तक निर्माण एजेंसी नागार्जुन कंस्ट्रक्शन को स्टेडियम का निर्माण पूरा करना है। राज्य सरकार भी चाहती है कि चुनाव से पहले ही देहरादून और हल्द्वानी के स्टेडियमों का लोकार्पण कर दिया जाए। स्टेडियम निर्माण के लिए राज्य सरकार पहले वन विभाग से 20 हेक्टेयर भूमि ली थी। जिस पर स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद राज्य सरकार ने एथलेटिक्स के स्टेडियम के लिए करीब 15 हेक्टेयर जमीन की ओर मांग की है। जिस पर केंद्रीय वन मंत्रालय ने पेच लगा दिया है।
केंद्रीय वन मंत्रालय ने इस पर हाथी कॉरीडोर समेत कई आपत्तियां लगाई हैं। जिसके कारण अब तक स्टेडियम के लिए भूमि नहीं मिल पा रही है। इस संबंध में खेल विभाग की वन विभाग के अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है। बावजूद अभी तक मामला विचाराधीन है। सहायक खेल निदेशक अख्तर अली ने बताया कि बातचीत अंतिम दौर पर है। उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले को सुलझा लिया जाएगा।
हॉकी ग्राउंड को बनाया जा सकता है एथलेटिक्स स्टेडियम
हल्द्वानी। इस बात की भी चर्चा है कि यदि वन विभाग से भूमि नहीं मिलती है तो अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में बन रहे हॉकी स्टेडियम को ही एथलेटिक्स स्टेडियम में बदल दिया जाएगा। निर्माण एजेंसी ने इस संबंध में खेल विभाग को एक प्रपोजल भी बनाकर भेजा है। इस संबंध में सहायक खेल निदेशक अख्तर अली ने बताया कि अभी इस संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। खेल विभाग पूरा प्रयास कर रहा है कि जल्द से जल्द एथलेटिक्स स्टेडियम के लिए भूमि मिल जाए।
हल्द्वानी में धीमा चल रहा स्टेडियम का कार्य
हल्द्वानी। स्पोर्ट्स स्टेडियम हल्द्वानी में बन रहे स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का काम धीमी गति से चल रहा है। खेल हास्टल और स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का काम अक्तूबर तक पूरा होना है। इसके अलावा स्टेडियम में घास भी लगाई जानी है। घास लगाने के लिए कम से कम छह माह का समय चाहिए। इसके लिए स्टेडियम को करीब छह माह तक बंद रखना होगा। यह तभी संभव है जब स्टेडियम में चल रहा कार्य पूरा हो जाए। जबकि हॉस्टल का काम धीमा चलने के कारण फुटबाल प्रशिक्षुओं को तरणताल में ठहराया गया है। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश समेत खेल सचिव भी स्टेडियम का दौरा कर निर्माण एजेंसी को जल्द से जल्द हास्टल का काम पूरा करने के निर्देश दे चुके हैं। बावजूद काम पूरा नहीं हो रहा है।