अब आंकिक (ब्रांड) का उपयोग करने वाले लेकिन इसका कर जमा करने से बचने वाले कारोबारियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। जीएसटी में ऐसे कारोबारियों को उत्पादों पर घोषणा पत्र प्रकाशित करना होगा। इस पत्र में उन्हें आंकिक के अन्यत्र इस्तेमाल किए जाने पर कोई दावा नहीं करने की घोषणा करनी है।
राज्य कर अधिकारियों के मुताबिक हर कारोबारी उत्पाद, सेवा के लिए एक आंकिक बनाता है। इसे आम भाषा में ब्रांड कहा जाता है। अगर यह आंकिक पंजीकृत होता है तो दूसरा कारोबारी, संस्थान, कंपनी इसका इस्तेमाल नहीं कर सकती है।
गैर पंजीकृत आंकिक का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पाया गया है कि पंजीयन नहीं होने के बावजूद भी कई कारोबारी एक ब्रांड का इस्तेमाल करते है। कोई दूसरा कारोबारी इसका उपयोग करता है तो विवाद तक की नौबत आ जाती है। कारोबारी का ब्रांड स्थापित तो हो जाता है, लेकिन इसका कर जमा नहीं करने के लिए इसका पंजीयन नहीं कराते हैं।
जीएसटी में सभी उत्पादों को ब्रांड और नॉन ब्रांड की श्रेणी में रखा गया है। उत्पाद का ब्रांड होने पर उत्पाद की कीमत का पांच फीसदी कर जमा करना है, जबकि नॉन ब्रांड पर कोई कर नहीं देना है। इसके साथ ही ब्रांड का इस्तेमाल करने वाले, लेकिन कर जमा नहीं करने वालों को घोषणा पत्र देना होगा।
इस घोषणा पत्र को कारोबारी को अपने उत्पाद के पीछे पैकेजिंग मैटेरियल में छापना होगा। साथ ही इसकी एक प्रति राज्य कर आयुक्त के दफ्तर में भी जमा करनी होगी। यदि कारोबारी ऐसा पत्र नहीं देता है तो उसको पांच फीसदी कर जमा करना होगा।
जो कारोबारी अपने आंकिक को ब्रांड नहीं मानते है तो उन्हें पांच फीसदी कर नहीं देना होगा। हां, उत्पाद पर इसकी घोषणा करनी होगी कि यदि कोई दूसरा कारोबारी इसका इस्तेमाल करे तो वह कोई दावा नहीं करेगा। - वीपी ओझा, सहायक आयुक्त, राज्य कर