हल्द्वानी में शिक्षा नगर के नाम से मशहूर लामाचौड़ क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। तेजी से विकसित हो रहे इलाके में सबसे अहम स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। अगर कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है तो यहां के लोगों को करीब 12 किमी पर हल्द्वानी या फिर 12 दूर कालाढूंगी जाना पड़ता है।
लामाचौड़ इलाका खेती, बागवानी के अलावा अब शिक्षा केंद्र के तौर पर पहचान बना रहा है। यहां पर हजारों की आबादी है, लेकिन जरूरत के लिये इलाके के लोगों को हल्द्वानी पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
लामाचौड़वासी लंबे समय से क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मांग कर रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षेत्र में ब्रिटिशकालीन पटवारी चौकी थी, जिसे जर्जर होने के कारण बंद कर दिया गया।
अब लोगों को जरूरी सर्टिफिकेट के लिए हल्द्वानी तहसील जाना पड़ता है। इसके साथ-साथ गंदगी, शौचालय, पेयजल, चोक नहरें, वोल्टेज समस्या से भी लोगों को दो चार होना पड़ता है।
स्कूल का गेट कूदकर भरते हैं पानी
चौराहे पर पेयजल व्यवस्था के नहीं होने से लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए प्राथमिक विद्यालय का गेट लांघकर स्कूल की टंकी से पानी भरते है।
ईंट और मिट्टी से भरी हैं नहरें
क्षेत्र की नहरें चोक हैं। नहरों में ईंटें, मिट्टी भरी होने के कारण कई बार पानी ओवरफ्लो होकर घरों और दुकानों में घुसता है। वहीं क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से कूड़ा जगह-जगह फैला रहता है।
नशे का बढ़ रहा कारोबार
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शाम के समय क्षेत्र की कुछ दुकानों में शराब बेची जाती है। इससे आम जनता को असुविधा होती है। शिक्षण संस्थानों के पास भी बीड़ी, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों का बिकना आम बात है।