नगर निगम के मेयर कांग्रेस ही नहीं भाजपा के लिए भी राजनीतिक मुद्दा बन रहे हैं। पहले दुकान किराया वृद्धि और अब मेयर के बयान से पुतले फूंकने की सियासत शुरू हो गई है।
कांग्रेसियों के बाद भाजपाई भी पुतलों के बहाने राजनीति चमकाने में जुट गए हैं। दोनों ही पार्टियों के पास कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं। विधानसभा चुनाव सिर पर हैं।
लिहाजा, पुतलों की राजनीति करके विकास के मुद्दों से आम जनता का ध्यान भटकाकर जनता की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश में जुटने लगे हैं।
हल्द्वानी कुमाऊं का सबसे बड़ा शहर है। यहां के लोगों का दुर्भाग्य है शहर का बुनियादी विकास नगर निगम और विधानसभा के झगड़े में फंस गया है। निगम में मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला भाजपा के, तो विधायक डा. इंदिरा हृदयेश कांग्रेस की हैं।
नगर निगम की हालत खस्ता है। विकास कार्य कराना तो दूर, कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं। विधायक डा. इंदिरा हृदयेश का ड्रीम प्रोजेक्ट भी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, आईएसबीटी और अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर है।
शहर के लोगों की बेसिक जरूरतों और समस्याओं के प्रति किसी भी नेता का ध्यान नहीं है। चुनावी तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। भाजपा और कांग्रेस के पास जनता से जुड़ा कोई मुद्दा ही नहीं है।
ऐसे में नगर निगम के मेयर कांग्रेसियों और भाजपाइयों के लिए राजनीतिक का हथियार बन रहे हैं। अब तक देश एवं विदेश में होनी वाली तात्कालिक घटनाओं, महापुरुषों के जन्मदिन, पुण्यतिथि, राष्ट्रीय पर्व, प्राकृतिक आपदाओं एवं दुर्घटनाओं पर विज्ञप्तियां एवं बयान जारी कर राजनीतिक करने वाले अधिकांश भाजपाई एवं कांग्रेसी मेयर के पुतले फूंकने के बहाने घरों और कामधंधों को छोड़कर बाहर निकलने लगे हैं।
कांग्रेसी कभी शीशमहल तो कभी बुद्ध पार्क में मेयर का पुतला फूंक रहे हैं। कभी धरने पर बैठकर शहर का बेड़ा गर्क करने का ठीकरा मेयर के सिर फोड़ रहे हैं। अब भाजपाई भी मेयर के समर्थन में मैदान में उतर आए हैं।
शुरुआत भाजयुमो ने विधायक डा. इंदिरा हृदयेश का पुतले फूंककर कर दी है। देखना है कि पुतले फूंकने की राजनीति आखिरकार भाजपा और कांग्रेस को जनता के कितने करीब जोड़ पाती है।
हल्द्वानी की मुख्य समस्याएं
दमुवाढूंगा गांव से शहर में शामिल तो हुआ, लेकिन हाल पहले ही जैसा
डाक्टरों और चिकित्सा उपकरणों की कमी से बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं
वार्डों में सड़कों का जर्जर हाल, पेयजल समस्या से जूझते लोग
शहर में फैली जगह-जगह गंदगी, कूड़े के ढेर, घूमते आवारा जानवर
अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात से जूझता शहर