दिन भर की प्रदेश कार्यसमिति में भाजपा ने एक लाइन तक का राजनीतिक प्रस्ताव लाना मंजूर नहीं किया। राजनीतिक प्रस्ताव की गैर जरूरी बताते-बताते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट गैरसैंण के मुद्दे पर मीडिया के सामने जमकर बोले। कई और मुद्दों पर भी अजय भट्ट ने कांग्रेस के सर ठीकरा फोड़ा।
यहां हुई भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति पार्टी संविधान से बंधने की मजबूरी अधिक दिखाई दी। खुद भाजपा नेता यह कहते रहे कि पार्टी संविधान में हर तीन माह में प्रदेश कार्यसमिति होने का उल्लेख है। इतना होने पर भी भाजपा इस बार की कार्यसमिति में एक लाइन का राजनीतिक प्रस्ताव लाने तक से बची।
यह तब है कि तीन माह पूर्व रुड़की में हुई प्रदेश कार्यसमिति के बाद सियासी मोरचे पर भाजपा को कई सवालों का सामना भी करना पड़ रहा है। भाजपा के लिए पहला सवाल गैरसैंण ही बना हुआ है। गैरसैंण को राजधानी घोषित करने के मुद्दे से स्थायी राजधानी का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। स्थायी राजधानी के इस सवाल को भाजपा अभी हल नहीं कर पाई है।
कार्यसमिति में भी इस पर नेताओं ने कोई बात नहीं की। इससे इतर, बाद में मीडिया से मुखातिब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने राजधानी के मुद्दे पर सफाई देना जरूर मंजूर किया। अजय भट्ट ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का इरादा जताया। साफ है कि भाजपा अपने इस रुख पर कायम रही तो प्रदेश भी दो-दो अस्थाई राजधानी वाला प्रदेश बनेगा।
इसी तरह जीरो टालरेंस को लेकर भी भाजपा को सवालों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा पहले लोकायुक्त विधेयक लेकर आई और अब यह विधेयक प्रवर समिति के हवाले है। जाहिर है कि इस मुद्दे पर भाजपा से जवाब देते नहीं बन रहा है। सूत्रों के मुताबिक खुद कई भाजपा विधायक लोकायुक्त के पक्ष में नहीं है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के घोटाले के मामले को सीबीआई केहवाले करने के मामले में भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी। इस मामले को विशेष जांच दल के बहाने संभालने की कोशिश है। अब भाजपा ने तबादला अधिनियम को जीरो टालरेंस की मुहिम से जोड़ा है।
प्रदेश कार्यसमिति में तबादला अधिनियम का जिक्र मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने किया और उन्होंने कहा कि प्रदेश में घोटाले दो हजार करोड़ रुपये से ऊपर तक पहुंच गए हैं।