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कुमाऊं में कोई नहीं दिल का दर्द जानने वाला 

Sat, 30 Apr 2016 01:15 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, हल्द्वानी।
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हल्द्वानी। कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी से लेकर पहाड़ तक में लोगों के दिल का दर्द जानने के लिए कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। सुशीला तिवारी एवं बेस अस्पताल में फिजीशियन ही हृदय रोगियों की जांच कर रहे हैं। खास बात ये है कि सुशीला तिवारी एवं बेस अस्पताल में कार्डिक यूनिट या कैथ लैब तक नहीं है। शासन को कई बार प्रस्ताव भेजा गया मगर प्रस्तावों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। दिल का इलाज कराने के लिए गरीबों को निजी अस्पतालों का ही रुख करना पड़ता है। 
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कुमाऊं में हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हृदय रोगियों को इलाज कराने के लिए निजी चिकित्सालयों में काफी अधिक धनराशि खर्च करनी पड़ती है। व्यवस्था ने भी गरीबों को तड़पने के लिए छोड़ दिया है। बेस अस्पताल में डा. विमल पंत कार्डियोलाजिस्ट के पद पर तैनात थे। वर्ष 2012 में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। उनकी मृत्यु के बाद बेस अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती नहीं हुई। बेस अस्पताल में कार्डिक फिजीशियन का पद तो है, मगर कार्डिक सर्जन का पद स्वीकृत नहीं है।

डा. पंत के निधन के बाद बेस अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट तैनात नहीं किया गया। कई बार प्रस्ताव जाने के बाद भी शासन स्तर पर बैठे लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। सुशीला तिवारी अस्पताल में डा. दीप पंत डीएम कार्डियोलाजिस्ट करने के लिए चंडीगढ़ गए थे। वहां से कोर्स पूरा करने के बाद लौटकर सुशीला तिवारी अस्पताल आए। एसटीएच में कैथ लैब या कार्डिक यूनिट के लिए प्रयास भी हुआ, मगर नतीजा सिफर ही रहा।
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एसटीएच के साथ हुए करार के अनुसार डा. पंत निर्धारित धनराशि जमाकर नौकरी छोड़कर चले गए। डा. पंत राममूर्ति अस्पताल बरेली में सेवाएं दे रहे हैं। पहाड़ पर भी कार्डियोलाजिस्ट नहीं है। ऐसे में हृदय संबंधी बीमारी होने पर मरीज निजी चिकित्सालय में जाता है या फिर दिल्ली एवं बरेली का रुख करता है। 
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