डीएम दीपक रावत ने जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर सीएचसी रामगढ़ का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। गर्भवती महिलाओं को मानकों के अनुसार आयरन की गोलियां वितरित न करने पर डीएम ने चिकित्सक और फार्मेसिस्ट को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि वह खंड चिकित्सा अधिकारी जीबी पंगरिया का वेतन रोकने के साथ ही उन्हें तत्काल निलंबित करें। इसके अलावा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के भी निर्देश दिए। डीएम ने मामले की जांच सीडीओ ललित मोहन रयाल को सौंपी है।
मंगलवार को अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान रजिस्टरों की चेकिंग के दौरान डीएम को पता चला कि वर्ष 2014 में गर्भवती महिलाओं को केवल 3000 आयरन की गोलियां दी गई हैं, जबकि रामगढ़ ब्लाक में 651 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं, जिन्हें 180 दिन अनिवार्य रूप से आयरन की गोलियां दी जानी थीं। इस प्रकार उक्त गर्भवती महिलाओं को कुल एक लाख 17 हजार 180 आयरन की गोलियां दी जानी चाहिए थीं। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डा. चंद्रशेखर टोलिया और फार्मेसिस्ट गीता पाठक को फटकार लगाई और खंड चिकित्सा अधिकारी को निलंबित करने के निर्देश दिए।
डीएम ने फोन पर सीएमओ डा. एलएम उप्रेती से पूछा तो उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के स्टोर में दो लाख आयरन की गोलियां उपलब्ध हैं। इस पर डीएम ने डाक्टर और फार्मेसिस्ट को निर्देश दिए कि तत्काल स्टोर में डिमांड भेजें और गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोलियां उपलब्ध कराएं। डीएम ने कहा कि तीन दिन के भीतर प्रत्येक एएनएम केंद्र में आयरन की गोलियां पहुंच जानी चाहिए। डीएम ने कहा कि जिस खंड चिकित्सा अधिकारी ने इस मामले में जरा भी लापरवाही बरती तो उसके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान सीडीओ ललित मोहन रयाल, संयुक्त मजिस्ट्रेट आशीष चौहान, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा.संजय साह, डा. चंद्रशेखर टोलिया आदि मौजूद थे।