शासन द्वारा 65 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी भीमताल ब्लॉक की ग्राम सभा नलनी सहित क्षेत्र की चार ग्राम सभाओं में पेयजल की भारी किल्लत बनी हुई हैं। शासन ने वर्ष 2002 में भीमताल ब्लॉक की ग्राम सभा नलनी, मंगोली, खमारी और गहलना ग्राम सभाओं को पेयजल आपूर्ति करने के लिए खमारी पंपिंग पेयजल योजना को स्वीकृत किया। इसके लिए 65 लाख रुपये खर्च कर इन गांवों में पेयजल आपूर्ति को सुचारु करना था। लेकिन, यह योजना इन गांवों के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाई। जिस कारण क्षेत्र के इन गांवों में पेयजल की भारी किल्लत बनी हुई है। प्राइमरी विद्यालय खमारी और नलनी में पेयजल उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जहां मिड-डे-मील बनाने के लिए भी कई कोस दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पानी की किल्लत के चलते ग्रामीण कोसों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
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ग्राम सभाओं के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए योजना पर 65 लाख खर्च करने के बाद अभी और 34 लाख रुपये की जरूरत है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा भी गया है। लेकिन दो वर्ष गुजर जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। जिस कारण ग्रामीण पेयजल से वंचित है।
- गणेश मेहरा, जिला पंचायत सदस्य।
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नलनी ग्राम सभा की कुल आबादी करीब 1200 है। गांव में पेयजल की किल्लत के चलते ग्रामीण गांव छोड़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय दुग्ध उत्पादन है। पेयजल की किल्लत के चलते ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन किया जायेगा।
- बचे सिंह अधिकारी, ग्राम प्रधान नलनी।
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गांव के साथ ही मेरे क्षेत्र में पड़ने वाले दो प्राइमरी विद्यालयों में पेयजल की भारी किल्लत है। इस समस्या को मेरे द्वारा प्रत्येक क्षेत्र पंचायतों की बैठकों में अधिकारियों के सामने रखा जाता रहा है। विद्यालयों में पानी की किल्लत का सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है, लेकिन अधिकारी खामोश हैं।
- गिरीश बहुखंडी, क्षेत्र पंचायत सदस्य, नलनी-खमारी।
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अब 70 वर्ष से अधिक उम्र हो चुकी है। मैंने आज तक पानी की इतनी समस्या नहीं देखी। पहली बार पानी के लिए इस तरह का हाहाकार देख रही हूं। घर के लोगों का पूरा समय पानी की व्यवस्था करने में ही गुजर जाता है। सरकारी अफसरों को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
- चंपा देवी, ग्रामीण।
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अनुसूचित जाती बहुल क्षेत्र बची दागड़ में पेयजल की भारी किल्लत है। पानी के अभाव में खेती भी चौपट होती जा रही है। गांव के हर घर का हर सदस्य दिनभर पानी के इंतजाम में ही लगा है। सबकी दिनचर्या गड़बड़ा गई है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
- दिनेश चंद्र आर्य, ग्रामीण।
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क्षेत्र में पानी की किल्लत से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्राम सभा के अंतिम छोर तक पेयजल लाइन बिछाने के लिए शासन को 34 लाख का स्टीमेट भेजा गया है। धन स्वीकृत होते ही गांव में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कर दी जाएगी।
- खगेंद्र जोशी, जूनियर इंजीनियर, जल संस्थान।