हल्द्वानी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नंधौर नदी में खनन और क्रशर संचालन पर रोक लगा दी है। रोक लगने की खबर के बाद से खनन व्यवसायियों में खलबली मची हुई है।
चोरगलिया क्षेत्र में क्रशर खुले हैं। इसमें एक क्रशर को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने मोर्चा खोला हुआ था। ग्रामीणों का आरोप था कि मानकों को ताक पर रखकर क्रशर चलाने की अनुमति दी गई है।
पचुवाखेड़ुा के उप प्रधान नंदन सिंह बोरा ने एनजीटी में केस दायर किया था। इसमें कहा गया था कि नंधौर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी के आसपास व्यवसायिक खनन हो रहा है। इसके अलावा स्टोन क्रशर लगे हैं, जहां पर नदियों का रेता, बजरी, पत्थर आदि को एकत्र किया जा रहा है। जबकि यह इको सेंसिटिव जोन में भी आता है। यहां पर पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन हो रहा है।
इसके अलावा याचिकाकर्ता ने कहा कि इन गतिविधियों से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इससे कई लोगों की मौत हो चुकी है और लोग दमा, एलर्जी आदि के शिकार हो रहे हैं। एनजीटी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया है। ऐसे में केंद्रीय वन मंत्रालय को दो सप्ताह का और समय देते हुए याचिकाकर्ता की फौरी राहत की मांग पर खनन पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।
गौला का भी चल रहा केस
हल्द्वानी। गौला का मामला भी एनजीटी में चल रहा है। गौला में नियमों को ताक पर रखने और उसके आर्डर का भी पालन न करने पर याचिकाकर्ता दिनेश पांडे ने एनजीटी में अवमानना याचिका भी दाखिल की हुई है। इसे लेकर भी खनन व्यवसायियों, वन निगम, वन विभाग में अंदर खाने खलबली मची हुई है। कोसी नदी को दूषित करने के मामले में भी एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है।
खनन सत्र खत्म होने को भी
हल्द्वानी। नदियों में खनन सत्र खत्म होने को भी है। नियमानुसार 31 मई तक सभी नदियों में खनन बंद कर दिया जाता है। इसके अलावा नंधौर नदी में दस साल की खनन की मियाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मिली थी, वह भी इसी साल खत्म हो रही है।