जिला प्रशासन भले ही मानसून में होने वाले नुकसान से बचाव की तैयारियों में जुट गया है, लेकिन नगर निगम अभी बेखबर है। जून दूसरे पखवाड़े से मानसून की बारिश शुरू हो जाएगी। नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं बल्कि मच्छर जनित बीमारियां की रोकथाम के लिए कीटनाशक दवाएं भी नहीं हैं। कीटनाशक दवाओं में नुवान, किंग फाग और मैलाथिन का सीमित स्टाक है। शहर में जितने वार्ड हैं उतना लीटर कीटनाशक तक नहीं ।
मौसमी बदलाव के साथ संक्रामक बीमारियां भी तेजी से फैलती हैं। खासकर, गर्मी के बाद बारिश होने से मच्छर पनपने से डेंगू, मलेरिया की सबसे अधिक शिकायत रहती है। शहर में गंदगी सबसे बड़ी समस्या है। जगह-जगह कूड़ा फैला होने से मक्खियां भिनभिनाती हैं। नालियां और ड्रेनेज सिस्टम फेल होने से जलभराव के कारण मच्छर तेजी से पनपते हैं।
मानसून से पहले जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और जलसंस्थान व्यवस्थाएं दुरुस्त करना शुरू कर देते हैं, ताकि बारिश होने से आम जनता को किसी तरह की दिक्कत न आए।
इसी के मद्देनजर जिला प्रशासन ने शहर की नालियों और नालों की सफाई शुरू करवा दी है। लेकिन नगर निगम बेखबर है। मानसून को लेकर निगम की तरफ से कोई तैयारी नहीं है। बजट और पर्याप्त मात्रा में कीटनाशक दवाएं भी नहीं हैं। बारिश के बाद मच्छरों को मारने के लिए किंग फाग और नुवान का छिड़काव होता है, ताकि मलेरिया और डेंगू को फैलने से रोका जा सके।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के स्टाक रिकार्ड के मुताबिक निगम में अभी मात्र 21 लीटर किंग फाग और 23 लीटर नुवान है। मैलाथिन भी मात्र 28 बैग है। जबकि नगर निगम में 25 वार्ड और दमुवाढूंगा क्षेत्र अलग से है। स्टाक में चूना 311 बैग, ब्लीचिंग 144 बैग और फिनाइल 200 लीटर है।
नालों की सफाई जारी
जिला प्रशासन की पहल पर नालों और नालियों की सफाई का अभियान जारी है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इंद्रानगर में दो नालों की सफाई चल रही है। नालों से काफी गंदगी बाहर आ रही है। इसके बाद शहर के बाकी बड़े नाले और नालियों की सफाई की जाएगी।