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'अमन' के बीच नीरज की 'विजय'

Sun, 09 Oct 2016 01:46 AM IST
निशांत खनी
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ABVP
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एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में छात्र-छात्राओं ने एबीवीपी और एनएसयूआई को नकार दिया। मतदाताओं ने एबीवीपी के बागी निर्दलीय नीरज मेहरा को अध्यक्ष चुनकर दोनों ही संगठनों के वजूद और प्रत्याशी के चयन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए।
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एमबीपीजी कुमाऊं का सबसे बड़ा कॉलेज और एनएसयूआई का गढ़ है। इस चुनाव में एनएसयूआई अपना गढ़ तो दूर, नाक तक बचाने में नाकाम रही। प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में एनएसयूआई शुरुआत से विवादों में घिर गई। आनन-फानन में हर्षित जोशी को प्रत्याशी घोषित करने के बाद एनएसयूआई को बैक फुट पर आना पड़ा।

हर्षित जोशी के चुनाव मैदान से बाहर होने के बाद एनएसयूआई ने बागी अमन सुयाल पर दांव खेलकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी मोल ले ली। इससे कार्यकर्ताओं ने बगावत कर दी और भितरघात कर निर्दलीय प्रत्याशी नीरज मेहरा को अंदरखाने समर्थन दे दिया।
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एबीवीपी भी प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में एक बार फिर मात खा गई। एबीवीपी ने ठाकुर और ब्राह्मण के झगड़े में जीती हुई सीट गंवा दी। एबीवीपी से विजय जोशी और नीरज मेहरा प्रबल दावेदार थे। ब्राह्मण लॉबी विजय जोशी और ठाकुर लॉबी नीरज के समर्थन में दी।

इससे संगठन में दो फाड़ हो गया। संगठन ने काफी मंथन के बाद विजय पर दांव खेल दिया। इससे नाराज ठाकुर लॉबी और एबीवीपी के पूर्व छात्रसंघ नेताओं नेताओं ने संगठन से बगावत कर नीरज मेहरा को निर्दलीय अध्यक्ष का चुनाव लड़वा दिया।

एनएसयूआई और एबीवीपी से ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में होने से निर्दलीय नीरज को ठाकुर वोट एकतरफा पड़ा। कॉलेज में ठाकुर मतदाताओं की संख्या अधिक है। नीरज के चुनावी रणनीतिकारों में एबीवीपी की ठाकुर लॉबी के साथ पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष संजय रावत की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

संजय रावत 2014 में एबीवीपी से बगावत कर निर्दलीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए। तब संजय एबीवीपी से प्रबल दावेदार थे और संगठन ने कार्तिक हर्बोला को टिकट देकर सीट गंवा दी थी। इस बार भी एबीवीपी ने यही गलती दोहराई और जीती हुई सीट हारने के साथ कार्यकर्ताओं में दो फाड़ कर दिए।
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नीरज मेहरा ने एबीवीपी के विजय जोशी को 195 मतों से हराकर शानदार जीत दर्ज की। एनएसयूआई के अमन सुयाल एक हजार वोटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए।
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