वीरपुर लच्छी गांव में करीब वह सब कुछ है, जो जरूरी होता है। करीब तीन किमी पर काशीपुर हाइवे, फसल नहीं सोना उगलते खेत, भरपूर पानी। शिक्षा को सरकारी स्कूल। पर करीब छह साल पहले लगे एक स्टोन क्रशर ने गांव की खुशियां छिन ली। यहां के बच्चे अब कखग नहीं बल्कि डंपरों से कैसे बचा जाए सीख रहे हैं। जब से गांव की नवीं की छात्रा आशा की मौत हुई है, तब से अधिकांश बच्चों का स्कूल जाना बंद पड़ा है। ग्रामीणों कहते हैं बाबू पढ़ाई जरूरी है, लेकिन जिंदगी से बड़ी तो नहीं। वहीं, स्कूल में ग्रामीणों की सुरक्षा को पीएसी ने डेरा डाला हुआ है।
कुछ दिन पहले पढ़कर कुछ बनने का सपना देख रही नवीं की छात्रा आशा के एक डंपर के चलते मौत हो गई। तब से गांव में भय बना हुआ है। आशा का भाई कमल सिंह कहते हैं कि सैकड़ों डंपर दिन-रात सड़क, गलियों को रौंद रहे हैं। इनसे पत्थर उछल कर गिरते रहते हैं, इसी से आशा की मौत हो गई। अब बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। सुनीता और फूलदेवी कहती हैं कि बच्चों की जान का खतरा है... कैसे स्कूल भेजे। चंदरी राम कहते है कि कुछ दिन तो माता-पिता अपने सुरक्षा में में जैसे तैसे स्कूल बच्चो को लाने और छोड़ने जाते थे, पर आशा की मौत ने हिम्मत तोड़ दी। स्कूल तो छोड़ो घर के पास ही डंपर दौड़ रहे हैं, बच्चो को आंगन तक भेजने में खतरा लगता है। करीब एक महीने से अधिकांश बच्चे स्कूल नहीं गए हैं, यह बच्चों की जिंदगी का सवाल है।