सुशीला तिवारी अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने बुधवार को राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
तिवारी एसटीएच के सामने मौन व्रत पर बैठ गए। पूर्व मुख्यमंत्री के मौन व्रत और धरने से प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सारी व्यवस्थाएं कराई गई। देर शाम को डाक्टरों के एक टीम ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया।
पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मंगलवार को सुशीला तिवारी अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने प्राचार्य डा. सीएमएस रावत से स्टाफ समेत मूलभूत सुविधाओं के बारे में जानकारी ली थी।
नर्सों, डाक्टरों की कमी, खस्ताहाल एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन, कार्डिक यूनिट न होना, आंकोलाजी फिजीशियन और सर्जन न होने के साथ ही ट्रामा सेंटर की व्यवस्था न होने से तिवारी खिन्न थे।
उन्होंने चिकित्सा-शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत से फोन पर बात की थी। उन्होंने अव्यवस्थाओं को लेकर एसटीएच के सामने मौन व्रत और धरना देने का ऐलान किया था।
बुधवार दोपहर लगभग 12.30 बजे तिवारी एसटीएच के सामने मौन व्रत पर बैठ गए। उनकी पत्नी डा. उज्ज्वला तिवारी ने कहा कि तिवारी ने लखनऊ में भी एसजीपीजीआई में अव्यवस्थाओं के खिलाफ सरकार का विरोध किया था।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एसजीपीजीआई में तत्काल व्यवस्थाओं में सुधार किया था और बेडों की संख्या बढ़ाई थी। इसका कोई राजनीतिक निहितार्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।
अव्यवस्था को व्यवस्था में बदलने के लिए तिवारी ने मौन व्रत पर बैठने का निर्णय लिया है। तिवारी को समर्थन देने वालों को दिन भर तांता लगा रहा। मौन व्रत पर उनके पुत्र रोहित शेखर तिवारी भी बैठे। इस दौरान मोहन पाठक, रईसुल हसन आदि थे।
ट्रामा सेंटर के लिए केंद्रीय वन मंत्री से की बात
ट्रामा सेंटर के लिए वन भूमि हस्तांतरित न होने पर पूर्व मुख्यमंत्री ने खेद जताया। उन्होंने केंद्रीय वन मंत्री प्रकाश जावडेकर से बात की और तत्काल वन भूमि हस्तांतरित कराने की मांग की। 125 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज में ट्रामा सेंटर प्रस्तावित है। इसके लिए छह करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो चुके हैं।
न दुर्गापाल की सुनीं न इंदिरा की मानीं
एसटीएच में अव्यवस्थाओं के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री के मौन व्रत और धरने के निर्णय से हड़कंप मच गया। उनके निर्णय की धमक देहरादून तक सुनाई दी। सरकार फौरन हरकत में आ गई।
वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश और दुग्ध मंत्री हरीश दुर्गापाल सर्किट हाउस तिवारी को मनाने पहुंचे। तिवारी ने न तो दुर्गापाल की सुनीं और न ही अपनी शिष्या डा. इंदिरा हृदयेश की मानीं।
कहा कि इसके पीछे राजनीति नहीं है, पहाड़ के लोगों को सुविधाएं मिलनी चाहिए। एसटीएच की हालत बहुत ही खराब है। मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। दोनों नेताओं को उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा। मनाने वालों में कांग्रेस नेता महेश शर्मा भी थे।