खोजोगे अगर तो रास्ते मिलेंगे, मंजिलों की फितरत है खुद चलकर नहीं आती...। इसी फलसफे पर यकीन करते हुए फेफड़ों की बीमारी से ग्रसित कुशाग्र ने अपनी इस कमजोरी से न सिर्फ पार पाया, बल्कि तैराकी में दिल्ली के लिए लगातार दूसरा गोल्ड जीता है।
इससे पहले गोवा में हुए नेशनल गेम्स में उत्तराखंड के इस लाल ने पदक जीता था। पिछले कुछ समय में इंजरी से परेशान रहे कुशाग्र अभी से ओलंपिक की तैयारियों में जुट गए हैं। इसके लिए उनके कोच एरिल्सन 24 घंटे उन पर नजर रख रहे हैं।
उत्तराखंड के चमोली जिले के कफललोडी गांव निवासी हुकुम सिंह रावत के बेटे कुशाग्र दिल्ली में पैदा हुए और वहीं से तैराकी सीखी। बेटे को सपोर्ट करने, के लिए हल्द्वानी आए हुकुम सिंह रावत ने बताया कि बचपन में कुशाग्र को पानी में खेलने का खूब शौक था। स्कूल में बने पूल में भी वह काफी वक्त बिताता था। एक दिन पता चला कि कुशाग्र को फेफड़ों की एलर्जी है। डॉक्टर ने फेफड़े मजबूत करने के लिए तैराकी और प्रणायाम की सलाह दी। उसे वर्ष 2012 - में स्वीमिंग क्लासेज ज्वाइन करा दी, जिसके बाद - उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुशाग्र की पहली कोच - एडना शर्मा थीं। पेशेवर स्वीमिंग के लिए वह ऑस्ट्रेलिया भी गया, जहां माइकल बोल ने उसकी स्किल पर काम किया। उसकी प्रतिभा देखते हुए उसे बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में भारतीय टीम में शामिल किया गया।
दिल्ली से एनओसी मिल जाती तो उत्तराखंड का होता यह गोल्ड
हुकुम सिंह रावत ने बताया कि हम चाहते थे कि उनका बेटा उत्तराखंड के लिए खेले। इसके लिए खेल विभाग ने संपर्क भी साधा लेकिन इवेंट शुरू होने से कुछ समय पहले हामी भरने से दिल्ली से एनओसी नहीं मिली। उम्मीद है कि कुशाग्र देश के लिए ओलंपिक जीतेगा।
बेटे के लिए छोड़ दी तरक्की
तबादले की वजह से बेटे की तैयारियों पर असर न पड़े, इसके लिए स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त हुकुम सिंह रावत ने कई बार प्रमोशन से मना कर दिया। माता-पिता को जहां अपने बेटे पर गर्व है, वहीं कुशाग्र को अभिमान है कि उसे ऐसे माता-पिता मिले जिन्होंने उसकी कामयाबी के लिए अपनी तरक्की से समझौता कर लिया।
आईएएस से जेएसडब्ल्यू कर रहे कुशाग्र : साई
(स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने कुशाग्र की प्रतिभा को देखते हुए टॉरगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) में उन्हें शामिल किया था। दो साल वहां प्रशिक्षण लिया, लेकिन एक इंजरी की वजह से उन्हें तैराकी से कुछ समय के लिए दूर होना पड़ा। ठीक होने पर उन्होंने कर्नाटक में इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (आईआईएस) जेएसडब्ल्यू ज्वाइन की, जहां उनके प्रदर्शन में और निखार आया। कोच एरिल्सन ने बताया कि खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के लिए आईआईएस की स्थापना हुई है।