सरकारी धन को किस तरह ठिकाना लगाया जाता है, यह देखना है तो प्राथमिक विद्यालय नारायण नगर का रुख करें। लापरवाही देखिए स्कूल का उद्घाटन हुआ नहीं कि हल्की बारिश में ही छत टपकने लगी। बरामदे में मलबा और कीचड़ भर गया। नजीजन स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया।
कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। आखिरकार शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत ग्रामीण भी व्यवस्थाओं से हार मान बैठे हैं। उन्होंने बच्चों का नाम कटाकर दूसरे स्कूलों में दाखिला करा दिया है।
पर चंद बेबस लोग आज भी व्यवस्था सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। 1927 में प्राथमिक विद्यालय नारायण नगर का निर्माण हुआ। भवन की जीर्णशीर्ण हालत को देखते हुए 2005 में विद्यालय को अस्थायी रूप से बारात घर में स्थानांतरित कर दिया गया।
ग्रामीणों की मांग के बाद 2007-08 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2.7 लाख रुपये की लागत से विद्यालय भवन का निर्माण हुआ। गुणवत्ता की कमी के चलते निर्माण के बाद भी यहां कक्षाएं नहीं चली। भवन के उद्घाटन से पहले ही हल्की बारिश में छत टपकने लगी और कमरों में मलबा और कीचड़ भर गया।
इसके बाद कई जन प्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्र का भ्रमण किया, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने भी कान नहीं दिए। व्यवस्था से तंग आकर संपन्न लोगों ने अपने बच्चों का दाखिला नैनीताल में करा दिया। वर्तमान में विद्यालय में दो शिक्षिकाएं और मात्र सात छात्र हैं।
2012 में अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। सोमवार को जब अमर उजाला की टीम वहां पहुंची और ग्रामीणों से स्कूल के बारे में जानकारी हासिल की तो लोगों का कहना था कि स्कूल के बारे में न ही पूछो तो अच्छा रहेगा। तीन वर्ष बाद भी हालात जस के तस हैं। विधायक जी का आश्वासन खोखला साबित हुआ।
2012 में विधायक सरिता आर्या ने बयान दिया था कि विद्यालय भवन बनने के बाद भी इसका सदुपयोग हुए बगैर खंडहर में तब्दील होना शर्मनाक है। वह शिक्षा मंत्री के समक्ष इस मामले को रखेंगी। शीघ्र ही कार्रवाई होगी, लेकिन यहां की स्थिति से जाहिर होता है कि विधायक का बयान हवाई साबित हुआ। ब्यूरो
जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) आरसी पुरोहित का रटा रटाया जवाब था कि विद्यालय भवन के जीर्णोद्धार से संबंधित मामला शासन में विचाराधीन है। इसके लिए 5 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा है। इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है। बता दें कि तीन वर्ष पूर्व भी तत्कालीन अधिकारी का यही जवाब था।