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उत्तराखंड: फसलों के दुश्मन को कपूर कचरी की नैनो ताकत से मिलेगी शिकस्त, औषधीय पौधे से बनाया केमिकल फ्री रामबाण

Thu, 05 Nov 2026 11:41 AM IST
Heera कैलाश पाठक

सार

उत्तराखंड में वन हल्दी (कपूर कचरी) से हरित नैनो तकनीक द्वारा बने जिंक ऑक्साइड नैनोकणों ने फसलों के लिए घातक निमेटोड को 64% तक निष्क्रिय किया, जबकि सामान्य अर्क का प्रभाव 38.67% रहा। यह शोध बायो नैनोसाइंस में प्रकाशित हुआ।
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वन हल्दी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड के हिमालयी जंगलों में उगने वाला वन कपूर अब खेती के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। औषधीय गुणों के लिए पहचाने जाने वाले कपूर कचरी यानी वन हल्दी (हेडिकियम स्पाइकेटम) के प्रकंद से वैज्ञानिकों ने हरित नैनो तकनीक के जरिये जिंक ऑक्साइड नैनोकण तैयार किए हैं। प्रयोगशाला में इन नैनोकणों ने फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले खतरनाक निमेटोड (मेलोइडोगाइनी इनकॉग्निटा) को 64 प्रतिशत तक निष्क्रिय करने में सफलता हासिल की जबकि पौधे के सामान्य अर्क का प्रभाव 38.67 प्रतिशत रहा। यह शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका बायो नैनोसाइंस में 22 अक्तूबर को प्रकाशित हुआ।

28.4 नैनोमीटर के कणों की आधुनिक तकनीकों से हुई जांच

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शोधकर्ताओं ने तैयार नैनोकणों की संरचना, आकार और रासायनिक विशेषताओं का विश्लेषण करने के लिए कई आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। इनमें यूवी-विजिबल, एक्सआरडी, एसईएम-ईडीएस, टीईएम और एफटी-आईआर जैसी तकनीकें शामिल रहीं। एक्सरे विवर्तन (एक्सआरडी) विश्लेषण में नैनोकणों की षट्कोणीय वर्टजाइट संरचना सामने आई। इनके क्रिस्टलाइट का आकार लगभग 28.4 नैनोमीटर पाया गया। इसके अलावा आरएसएम अनुकूलन और आणविक डॉकिंग के माध्यम से नैनोकणों की जैविक सक्रियता और संभावित क्रियाविधि को समझने का प्रयास किया गया।

कई संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया शोध
इस शोध का नेतृत्व बेरीनाग पीजी कॉलेज के डॉ. महेश चंद्र विश्वकर्मा, एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी के डॉ. बालम सिंह बिष्ट और पंतनगर विश्वविद्यालय के डॉ. रविंद्र कुमार ने किया। शोध दल में शोध छात्र मनोज प्रसाद टम्टा और पूजा बर्गली के साथ हेमंत कुमार जोशी, दीपशिखा आर्य, राजेश कुमार और विशाल कुमार सहित अन्य शोधकर्ता शामिल रहे। नन्ही परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान पिथौरागढ़, क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान रानीखेत और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के शोधकर्ताओं ने भी इसमें योगदान दिया।

इस शोध की खासियत यह है कि इसमें उत्तराखंड की स्थानीय जैव-विविधता का उपयोग आधुनिक नैनो प्रौद्योगिकी के साथ किया गया है। वनस्पति आधारित हरित संश्लेषण के जरिये तैयार किए गए जिंक ऑक्साइड नैनोकण भविष्य में कृषि क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण के विकल्प विकसित करने में मददगार हो सकते हैं। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं। - डॉ. बालम सिंह बिष्ट, एमबीपीजी कॉलेज

 

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