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नैनीताल पालिका ने कहा, उनके क्षेत्र में नहीं जलाए जा रहे बांज के पत्ते

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नैनीताल। हाईकोर्ट ने नैनीताल में स्थानीय लोगों और सफाई कर्मचारियों की ओर से बांज के पत्ते जलाने को लेकर मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र का स्वत: संज्ञान लेकर उसे जनहित याचिका के रूप में सुना। नगर पालिका की ओर से अदालत को बताया गया कि उनके क्षेत्र में बांज के पत्ते नहीं जलाए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने नगर पालिका का पक्ष सुनने के बाद जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
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मंगलवार को नगर पालिका नैनीताल की ओर से न्यायालय को बताया गया कि पालिका ने बांज के सूखे पत्तों को एकत्र करने के लिए पंत पार्क में तीन, केनेडी पार्क में एक और अलग-अलग स्कूलों में पांच कंपोजिस्ट पिट बनाए हैं। यदि कोई वन क्षेत्र में बांज के पत्ते जलाता है उसकी जिम्मेदारी वन विभाग की है। पालिका की ओर से ये भी कहा गया कि भविष्य में कोई बांज के पत्तों को जलाता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ नगर पालिका कार्रवाई करेगी। इस आधार पर कोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा मेघा पांडे ने इसी साल 23 मार्च को मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा था कि नैनीताल बांज के जंगल से घिरा हुआ है। बांज की सूखी हुए पत्तियां सड़क, गलियों, छतों में गिरती रहती हैं। स्थानीय लोग और सफाई कर्मचारी सड़क, गलियों और छतों को साफ करते समय इनको जला देते हैं। इसका प्रभाव यहां के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। छात्रा ने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की थी। पत्र में बांज के पत्तों की उपयोगिता के बारे बताया गया था कि इससे खाद बनाई जा सकती है और ये पत्तियां जमीन की नमी को बनाए रखती हैं। इनके नीचे कई प्रकार के कीड़े व सांप आदि रहते हैं।
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