हल्द्वानी। नैनीताल डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक (डीसीबी) प्रबंध समिति को 15 साल बाद नया अध्यक्ष मिल गया है। भाजपा समर्थित रविंद्र सिंह रैकुनी ने शुक्रवार को अध्यक्ष पद की कमान संभाली है।
डीसीबी की प्रबंध समिति के उपसभापति (उपाध्यक्ष) पद पर चुनाव नहीं हो पाया। एकमात्र प्रत्याशी निधि नेगी का नामांकन पत्र गलत पाए जाने पर खारिज कर दिया गया। निर्वाचन अधिकारी सुरेश प्रकाश बैनी ने अन्य क्षेत्रों के लिए चुने गए प्रतिनिधियों के नाम भी घोषित किए। इनमें भावना गंगोला, गोविंद सिंह, जितेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की जबकि धरमपाल, गोपाल सिंह, मंजू जलाल और कपिल रावत निर्विरोध चुने गए।
पांच बार अध्यक्ष रहे राजेंद्र नेगी
रविंद्र रैकुनी ने राजेंद्र सिंह नेगी का स्थान लिया है जो पांच बार अध्यक्ष रहे थे। नेगी का पहला कार्यकाल 2007 में शुरू हुआ था। उन्होंने डेढ़ दशक से अधिक समय तक बैंक की प्रबंध समिति का नेतृत्व किया। हालांकि 2008 में एक वर्ष के लिए पंकज पांडे डीसीबी अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 2023 तक नेगी का दबदबा बना रहा। यह डीसीबी के इतिहास में सबसे लंबे कार्यकाल में गिना जाता है। वर्ष 2023 में निर्वाचित बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हुआ। इसके बाद डीसीबी का संचालन दो साल नौ महीने तक प्रशासक के हाथ में रहा। अब चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंक को फिर से निर्वाचित अध्यक्ष मिला है।
14 हुए डीसीबी के निदेशक
डीसीबी में निदेशकों की कुल संख्या 13 से बढ़कर 14 हो गई है। सरकार ने ओखलकांडा की दीपा नयाल पत्नी कुंदन नयाल को निदेशक नामित किया है।
आखिरी वक्त बदले समीकरण
सहकारिता से राजनीति में कदम रखने वाले रविंद्र सिंह रैकुनी के सामने भाजपा समर्थित निश्चल पांडे ने भी डीसीबी अध्यक्ष पद के जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट को नामांकन पत्र सौंपा था। सूत्रों की मानें तो सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के करीबी माने जाने वाले निश्चल पांडे का अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन आखिरी वक्त में समीकरण बदल गए।
भाजपा ने मुझ पर विश्वास जताकर मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी है। पिछले अध्यक्षों ने भी अच्छा काम किया है, उसे और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। डीसीबी की पिछले तीन साल से वार्षिक बैठक नहीं हुई है। अब जल्द बैठक कराई जाएगी। किसान और सहकारिता ऋण समेत अन्य योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना प्राथमिकता होगी। -रविंद्र सिंह रैकुनी, अध्यक्ष, डीसीबी