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दर्द: ममता लुटाई, त्याग किए...फिर भी मां अकेली रह गई, वृद्धाश्रम की चौखट पर थम गईं माता की उम्मीदें

Sat, 08 Mar 2025 10:42 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी

सार

अपने बच्चों के सपनों को सच करने के लिए मां दिन-रात मेहनत करती है। आज उसी मां को देखने वाला कोई नहीं। बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद लिए आंखें ताकती रहीं, मगर अपने ही पराए हो गए। ऐसा दर्द वृद्धाश्रम में रहने वाली कई महिलाओं का है। 
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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त्याग और ममता की मूरत मां, जिसने अपने पूरे जीवन में अपने बच्चों और परिवार के लिए अपनी हर खुशी कुर्बान कर दी, आज वही मां अकेलेपन और उपेक्षा का दर्द सह रही है। अपने बच्चों के सपनों को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत की, खुद भूखी रही लेकिन कभी बच्चों को भूखा नहीं सोने दिया, आज उसी मां को देखने वाला कोई नहीं। बुढ़ापे में सहारे की उम्मीद लिए आंखें ताकती रहीं, मगर अपने ही पराए हो गए। ऐसा दर्द वृद्धाश्रम में रहने वाली कई महिलाओं का है। महिला दिवस पर उन्हें भी कोई पूछने वाला मिले, यही उनकी आशा है।

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केस-1

बेटा पूछता है मां रहने की व्यवस्था हो गई तुम्हारी
पति की मौत के बाद 49 वर्षीय महिला का युवा बेटा उन्हें ऐसा चकमा देगा, उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। शहर की रामपुर रोड की रहने वाली महिला की शादी दिल्ली में हुई थी। पति प्राइवेट कंपनी में कार्य करते थे, सबकुछ अच्छा चल रहा था फिर कुछ सालों बाद पति को ब्रेन हेमरेज हो गया और वह बेटे के साथ किराये के मकान में रुद्रपुर में रहने लगीं। फिर एक दिन 24 साल के बेटे ने मां से कहा कि वे लोग दूसरी जगह जाकर रहेंगे सामान पैक कर लो... मां ने सब सामान पैक कर लिया और बेटे ने जरूरी सामान जिसमें जेवर, नकदी आदि थे, वे लेकर ऐसा निकला कि बाकी बचा सामान लेने वह दोबारा घर नहीं लौटा। मां टकटकी लगाई राह ताकते रही और बेटे ने कोई संपर्क नहीं किया। ऐसे हालातों में मकान मालिक ने शहर के चौफला चौराहा स्थित जवाहर ज्योति दमुवादूंगा स्थित आश्रय सेवा समिति में संपर्क किया और जगजीत कौर को यहां छोड़ दिया। वह बताती हैं कि हाल ही में बेटे का फोन आया, उसने मां की कुशलक्षेम पूछी और अगले माह आने की बात कही है। उसने अपने बारे में कुछ नहीं बताया कि वह कहां है क्या कर रहा है। मां के चेहरे पर कोई खुशी नहीं, उसे पता है कि बेटा सिर्फ रस्म अदायगी कर रहा है। वह उसे लेने तो दूर अगर मिलने भी आ जाए तो गनीमत होगी।

केस-2

क्या पोता दादी के बारे में पूछता होगा

एक और महिला यहां काफी समय से हैं। उनकी शादी 12 साल की उम्र में हो गई थी। पति की मौत भी तब हो गई जब वह 20 साल की थीं। मायके वालों ने मुंह फेर लिया, ससुराल वालों ने भी कोई संबंध नहीं रखा। इसके बाद किसी तरह खुद को संभाला और खेतीबाड़ी की और मेहनत के बूते एक बीघा जमीन खरीदी, बेटे की शादी कराई। उन्हें उम्मीद थी कि 2 बहु-पोते और बेटे के साथ आगे की जिंदगी का सफर आराम से बीतेगा पर कलेजे का टुकड़ा ऐसा रंग दिखाएगा, पता नहीं था। एक दिन खराब आदतों के शिकार बेटे ने मां के साथ जमकर मारपीट कर उन्हें घर से निकाल दिया। पुलिस ने मदद करते हुए आश्रय सेवा समिति में भर्ती करवा दिया और वर्ष 2021 से वह यहीं रह रहीं हैं। उन्हें उम्मीद थी कि बेटे को शायद कभी उनकी याद आए पर नियति को कुछ और ही मंजूर था और बेटे की भी मौत हो गई। बहु ने एक दफा भी कभी अपनी सास की सुध नहीं ली, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि 13 वर्षीय पोता शायद कभी मिलने आए।

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