नैनीताल। 23 जनवरी 1585 को इंग्लैंड में जन्मी मदर मैरी का जीवन त्याग, तपस्या और नारी शिक्षा को समर्पित रहा। उस दौर में जब महिला शिक्षा को अपराध माना जाता था, उन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और बालिकाओं के लिए ज्ञान के द्वार खोले। उनका मानना था कि नारी की अशिक्षा ही समाज की सबसे बड़ी कमजोरी है। उन्होंने यूरोप सहित दुनिया के कई देशों में शिक्षण संस्थानों की स्थापना की। नैनीताल स्थित सेंट मैरी कॉन्वेंट जैसे संस्थान उनके आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं। मदर मैरी पर निजी स्तर पर शोधरत डाॅ.कुसुम शर्मा बताती हैं कि वर्तमान में उनकी जयंती को मदर मैरी वार्ड सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है जो उनके सेवा भाव और दूरदृष्टि को नमन करने का अवसर है।