हल्द्वानी शहर के गौलापार की कुंवरपुर न्याय पंचायत के मानपुर गांव में मंगलवार शाम पानी के निर्माणाधीन टैंक में दम घुटने से मां और दो बेटे अचेत हो गए। आनन-फानन उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
धर्मेंद्र और खुशाल सिंह के पिता भीम सिंह की 12 साल पहले एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी मां सरस्वती देवी ने किसी तरह परिवार को संभाला। सरस्वती की दो बेटियां हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। खुशाल सिंह परिवार में सबसे छोटे थे। धर्मेंद्र अपने पीछे पत्नी, बेटा-बेटी जबकि खुशाल पत्नी और पुत्र को रोता बिलखता छोड़ गए हैं।
धर्मेंद्र प्लंबर, खुशाल थे इलेक्ट्रिशियन
सरस्वती देवी के बेटे खुशाल सिंह का विवाह करीब तीन साल पहले हुआ था। उनका एक बेटा है। उनकी पत्नी गर्भवती है। इस पर पूरा परिवार खुश था लेकिन हादसे ने उनके परिवार की खुशियां छीन लीं।
टैंक से निकलने की जगह पड़ी कम
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गांव की प्रधान उमा रैक्वाल और सामाजिक कार्यकर्ता नीरज रैक्वाल ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने की मांग की है। रैक्वाल ने हादसे की निष्पक्ष जांच कराने पर भी जोर दिया है।
सुशीला तिवारी अस्पताल के एमएस डॉ.अरुण जोशी ने कहा कि टैंक में तीन लोगों की मौत का सही कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही चल पाएगा। ऐसे बंद टैंकों में अक्सर मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं जिसके कारण अंदर जाने पर दम घुटने की घटनाएं होती हैं।