नैनीताल। हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में बटर उत्सव में दो सौ से अधिक पर्यटकों को प्रतिबंधित करने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि बुग्याल अत्यधिक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र हैं। बुग्यालों को संरक्षित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने साफ किया कि उत्सव में आने और भाग लेने वाली स्थानीय आबादी की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है, यह प्रतिबंध केवल पर्यटकों के संबंध में है। कोर्ट ने कहा है कि बटर उत्सव एक धार्मिक त्योहार है। इसलिए त्योहार के आयोजन के लिए पर्यटकों की उपस्थिति आवश्यक नहीं है। किसी भी स्थिति में अधिकतम दो सौ पर्यटक महोत्सव में आ सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार दयारा पर्यटन उत्सव समिति रायथल उत्तरकाशी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि अगस्त 2023 को दयारा बुग्याल में होने वाले बटर उत्सव में दो सौ से अधिक पर्यटकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध 2014 में औली बेदिनी बुग्याल संरक्षण समिति बनाम उत्तराखंड राज्य और अन्य के मामले में 2018 में हाईकोर्ट के निर्णय के आलोक में लगाया गया है। इस निर्णय में राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह उत्तराखंड में बुग्यालों का दौरा करने वाले पर्यटकों की संख्या को दो सौ तक सीमित रखें। याचिकाकर्ता का कहना था कि बुग्याल में आयोजित होने वाले बटर फेस्टिवल में आने वाले पर्यटकों की संख्या पर प्रतिबंध लगाने का कोई कारण नहीं है। यह ट्रेकिंग वाहन पहुंच वाले स्थान से लगभग सात किलोमीटर दूर है, जहां वाहन पहुंच सकते हैं। बटर फेस्टिवल दशकों से पारंपरिक रूप से हर साल आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष यह 16 और 17 अगस्त 2023 को आयोजित किया जा रहा है।