फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानसून की बारिश बचाएगी  चीड़ के जंगल की आग से

Thu, 28 Jul 2016 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जंगल की आग से निपटने के लिए वन महकमे ने अब मानसून की बारिश का सहारा लेना शुरू किया है। हींग लगे न फिटकरी और रंग चोखा की कहावत को चरितार्थ करते हुये वन विभाग ने चीड़ के जंगलों में कई जगहों पर खाइयां खोदी है। छह फिट की कुछ-कुछ दूरी पर खोदी गई इन खाइयों में पानी भरने पर चीड़ के जंगलों में आने वाले समय में नमी बरकरार रहेगी और चीड़ का पनपना भी रुक सकेगा। वन विभाग अब तक करीब 7050 हेक्टेयर में खाई खोद चुका है और इनमें पानी भरने का काम इस समय बारिश कर रही है।
विज्ञापन


जंगलों की आग वन विभाग के लिए खासी मुसीबत का सबब रही है। आग पर काबू पाने के लिए विभाग को एयर फोर्स और एनडीआरएफ समेत दूसरे विभागों की भी मदद लेनी पड़ती रही है। आग बढ़ने का एक बड़ा कारण चीड़ और उस पर भी बरसात न होने के कारण उसका शुष्क होना था। इस एक सामान्य से तथ्य का उपयोग करते हुए वन विभाग ने नैनीताल वन प्रभाग समेत दूसरे प्रभाग जहां पर चीड़ के पेड़ हैं, वहां पर दो फीट गहरे, दो फीट चौड़े और छह फीट की कुछ-कुछ दूरी पर गहरी खाई खोदी है। इसमें इन दिनों मानसून की बरसात के बाद पानी भर रहा है। 

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. राजेंद्र सिंह बिष्ट के मुताबिक कैंपा योजना के तहत नैनीताल, अल्मोड़ा आदि चीड़ वाले प्रभागों में न्यूनतम पांच हेक्टेयर में खाई खोदी गई। इन खाइयों में भरा पानी चीड़ जंगल में नमी बढ़ायेगा। नमी बढ़ने से चीड़ के अलावा दूसरी प्रजातियों के पनपने का मौका भी मिलेगा। साथ ही इस नमी के कारण चीड़ को पनपने के भी कम अवसर मिलेंगे। 
विज्ञापन


आस्था की प्रतीक तुलसी भी रोकेगी जंगल की आग
हल्द्वानी। चीड़ के जंगल में तुलसी के प्लांटेशन की योजना बनाई गई है। हल्द्वानी वन प्रभाग डीएफओ डॉ. चंद्रशेखर सनवाल कहते हैं कि यह ट्रायल शुरू किया गया है। इसके तहत सेला ब्लॉक के एक हेक्टेयर एरिया में 12 महीने हरी रहने वाली लौंग तुलसी, श्याम तुलसी आदि प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। तुलसी चीड़ के नीचे और आसपास उग भी जाती है। इसके लगने से हरियाली और नमी आग रोकने में मददगार हो सकती हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें