स्याल्दे (अल्मोड़ा)। मोबाइल की लत बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है। घंटो स्क्रीन पर नजरे गड़ाने से जहां उनकी आंखें खराब हो रही है वहीं उनके फिजिकल मेंटल ग्रोथ पर भी असर पड़ रहा है। तीन साल की छोटी उम्र में बच्चों को नजर चश्मा लग रहा है।
माता की ममता पर मोबाइल फोन भारी पड़ रहा है। जिस उम्र में बच्चों को मां का प्यार चाहिए, उस उम्र में अब उन्हें मोबाइल फोन चाहिए। बच्चे मोबाइल के लती होते जा रहे हैं जो गंभीर चिंताजनक है। चिकित्सकों के मुताबिक मोबाइल स्क्रीन की ब्लू लाइट बच्चों की आंखों के साथ ही उनके दिमाग के लिए भी खतरनाक है। इस लाइट से मस्तिष्क में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन कम हो जाते है। इस कारण नींद कम आती है और स्लीप साइकिल बिगड़ जाती है। इससे बच्चे किसी भी चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। बच्चे मोबाइल लेकर एक जगह बैठ जाते हैं। शारीरिक गतिविधि न होने के कारण उनकी हड्डिया कमजोर होने लगती है।
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अवसाद का हो रहे शिकार
मोबाइल के लती बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। बच्चों को सोशल मीडिया वाली लाइफ बहुत अच्छी लगती है। सोशल मीडिया लाइफ से बच्चे आपस में तुलना करते हैं। इस कारण वह तनाव में रहते हैं। खुद को परफेक्ट बनाने के चक्कर में वह कई बार गलत कदम भी उठा लेते हैं।
ऐसे छुड़ाएं बच्चों से मोबाइल की लत
- बच्चों को कलर करने के लिए दें या फिर उन्हें छोटे-छोटे टास्क दें।
- उन्हें उनके पसंदीदा किताबें पढ़ने के लिए दें ताकि उनमें पढ़ने लिखने की रुचि बढ़ सके।
- बच्चों को खेलकूद में अधिक से अधिक भागीदारी कराएं।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्कूल में होने वाली गतिविधियों में उन्हें भागीदारी कराएं।
- उन्हें मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल के नुकसान के प्रति आगाह करें।
कोटमोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में आंख संबंधी बीमारी बढ़ रही है। अस्पताल में लगातार ऐसे बच्चे आ रहे हैं। बच्चों की नजर कमजोर हो रही है। पांच साल की उम्र में ही बच्चों को नजर का चश्मा लग रहा है। अभिभावक बच्चों को स्क्रीन से दूर रखे। - डॉ. दीप प्रकाश पार्की, नागरिक अस्पताल रानीखेत अल्मोड़ा