खनन गेटों पर मिलीभगत या दबंगई से खनिज चोरी अब नहीं हो पाएगी। ऐसे किसी भी प्रयास को मोबाइल फोन असफल करेगा। वन महकमे ने खनिज चोरी रोकने और इस कार्य में लिप्त अपराधियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र करने के लिए खनन गेटों पर इंटरनेट, कैमरों के साथ स्मार्ट फोन तकनीक की मदद लेने का फैसला किया है।
अब अफसर मोबाइल के जरिये ही गेटों पर क्या हो रहा है, उस पर नजर रखेंगे। साथ ही गेटों पर वायरलेस सिस्टम स्थापित किया गया है, जहां से वह कर्मियों को जरूरत पड़ने पर निर्देश भी दे सकेंगे।
गौला के खनन गेटों पर खनिज चोरी की शिकायतें मिलती रही हैं। इसमें कथित तौर पर कई बार कर्मियों के शामिल होने की बात सामने आती रही है। इसे देखते हुए जंगलात ने तकनीक की मदद लेने का फैसला किया। इसके तहत नदी के 29 किमी खनन क्षेत्र में लगे 11 गेटों पर कैमरे, इंटरनेट कनेक्शन लगाने का काम शुरू किया गया है।
शीशमहल और राजपुरा गेट पर इसे इंस्टॉल कर दिया गया है। जिसके बाद मोबाइल पर लिंक लेने और थ्री जी इंटरनेट की सुविधा के चलते गेटों पर नजर रखना संभव हो गया है।
इस बाबत तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ पीके पात्रों कहते हैं कि उच्चाधिकारियों के अलावा प्रभाग के मातहत अधिकारियों के पास भी स्मार्ट फोन हैं उन्हें भी लिंक दिया गया है। इसके जरिये वह आसानी से खनन क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों को देख सकते हैं। कंप्यूटर के जरिये भी यह संभव है।