गौला में हालात बिगड़ गए हैं। मनमाने तरीके से खनन हो रहा है। वन निगम ने जो सीसीटीवी कैमरे लगाये हैं, वे छुट्टी वाले दिन बंद रहते हैं। इसके अलावा खनन नीति के तहत वाहनों में जो चिप लगाई जानी थी, वह काम भी आज तक पूरा नहीं हो सका है। अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के चलते प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है।
गौला में खनन कराने की जिम्मेदारी वन विकास निगम को दी गई है। साल भर में करीब सात महीने खनन कराने के लिए करोड़ों का राजस्व निगम को मिलता है। पर राजनैतिक दबाव से लेकर अंदरखाने के ‘हालात’ के चलते निगम व्यवस्थित तरीके से खनन कराने में कई बार सफल नहीं हो सका है।
अवैध खनन रोकने के लिए गेटों पर सीसीटीवी लगाये गए थे, जो बताया जाता है कि अवकाश वाले दिन कई बार बंद हो जाते हैं। खनन वाहनों पर आधुनिक तरीके से नजर रखने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी वाली चिप लगाई जानी है, इसका काम भी आज तक पूरा नहीं हो सका है। जबकि डेढ़ महीने के बाद खनन अवधि खत्म होने को है।
इसके अलावा कंप्यूटर आपरेटर के जरिये वाहनों के वजन में खेल करने के मामले में भी सामने आये हैं। डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि प्रतिबंधित एरिया में अवैध खनन, वजन में हेराफेरी और सीसीटीवी न चलने की शिकायत मिली है। इसकी जांच कराई जा रही है। इसके अलावा वाहनों में चिप लगाने का काम पूरा नहीं हुआ है। निगम के अधिकारी मिले थे, जिनके सम्मुख इन बातों को लेकर आपत्ति जताई गई है।
वहीं, प्रशासन से लेकर वन विभाग की नींद एनजीटी के रुख को लेकर उड़ी हुई है। गौला में अवैध खनन को लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और राज्य (शासन) की संयुक्त टीम की जांच करने को कहा है। यह टीम इसी महीने निरीक्षण को आ सकती है, जिसको लेकर कार्रवाई तेज की गई है। टीम की रिपोर्ट और एनजीटी (चार मई) की सुनवाई पर आगे खनन का भविष्य तय होगा
नदी में दिखने लगी मिट्टी
हल्द्वानी। गौला में पत्थर खत्म होने को हैं, खनन वाहनों ने नदी में गहरी खुदाई कर दी है। जिससे मिट्टी तक दिखने लगी है। यह बात खुद प्रशासन और खान विभाग की संयुक्त टीम के निरीक्षण में सामने आई है। हालांकि रिपोर्ट में उपखनिज पर्याप्त मात्रा में भी होने का साथ-साथ दावा कर दिया गया है। जबकि वन, वन निगम की रिपोर्ट में कई गेटों पर प्रतिबंधित एरिया में अवैध खनन की पुष्टि तक हो गई थी।