समय से बजट न मिलने का ही सबब है कि वन विभाग इस बार करीब 13 लाख पौधे नहीं रोप पाएगा। ऑनलाइन भुगतान के आदेश के चलते पुरानी उधारी की व्यवस्था भी इस बार ध्वस्त हो गई है। ये पौधे नहीं लगे तो एडवांस सॉयल वर्क का करीब पौने छह करोड़ रुपये का काम भी बेकार हो जाएगा। वन विभाग की कोशिश फिलहाल किसी तरह से बीच का रास्ता निकालने की है।
वन विभाग हर साल वनाच्छादित क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए करोड़ों पौधे रोपित करता है। इन पौधों को रोपने की तैयारी मार्च में ही आरंभ हो जाती है। इस माह में एडवांस स्वायल वर्क किया जाता है। इसमें जंगलों से झाड़ी कटान, मिट्टी में खाद मिलाना, गुड़ाई, नाली खोदना वगैरह की जाती है।
तीन चार माह बाद बारिश के सीजन शुरू होने पर पौधे रोपने का काम किया जाता है। जुलाई का पहला हफ्ता पौधे रोपने के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। जुलाई-अगस्त में बारिश, धूप मिलने से पौधे को पनपने के लिए सभी घटक मिल जाते हैं। विभाग के मुताबिक एक हेक्टेयर में स्वायल वर्क में करीब 30 हजार रुपये का खर्च होता है जबकि पौधे रोपने में तकरीबन इतना ही खर्चा आता है।
पर्वतीय क्षेत्रों में पत्थरों की सुरक्षा दीवार बनाने में यह खर्चा दोगुना हो जाता है। इस साल भी पश्चिमी वन वृत्त के अंतर्गत चार वन प्रभागों में 13 लाख से अधिक पौधे रोपने के लिए 1931.24 हेक्टेयर वन भूमि में करीब पौने चार करोड़ से एडवांस स्वायल वर्क पूरा कराया गया है।
इधर मानसून सीजन शुरू होने में चंद दिन बाकी हैं और वन को बजट नहीं मिला है। बजट नहीं मिलने से वन विभाग पौधे रोपने में लाचार हैं ऐसे में यदि पौधे रोपे नहीं गए तो एडवांस स्वायल वर्क में खर्च किए करोड़ों रुपये बेकार जा सकते हैं।
ई पेमेंट भी पौधे रोपने में बना रोड़ा
इस बार पौधे रोपने में ई पेमेंट भी रोड़ा बना है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पूर्व में बजट नहीं मिलने पर रेंज आफिसर अपनी रेंज में विभिन्न मदों जहां बजट हो, उधारी व अपनी जेब से रकम मिला कर पौधे रोपा करते थे। छह-सात माह बाद बजट मिलने पर सभी का हिसाब चुकता कर दिया जाता था।
इस बार ई पेमेंट होने की वजह से आरओ भी पौधे रोपने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। दरअसल पौधे रोपने वाले हर मजदूर को बैंक से आन लाइन व चेक पेमेंट किया जाएगा। ऐसे में उधारी में कोई भी मजदूर भी काम नहीं करेगा दूसरा अगर आरओ पेमेंट कर देता है तो मजदूर से वापस कैसे मिलेगी। यही वजह है कि आरओ ने भी इस बार हाथ खड़े कर दिए हैं।
वन डिवीजन भूमि हेक्टेयर में पौधों की संख्या
तराई पूर्वी 976 723660
तराई केंद्रीय 271.40 150590
हल्द्वानी 161.60 161600
तराई पश्चिमी 522.24 272280
कुल भूमि 1931.24
यह बात सही है कि पौध रोपण के लिए समय से बजट नहीं मिल पाया हैँ। फिर भी पौध रोपण के लिए कोई तरीका निकाला जाएगा।
- डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक पश्चिमी वन वृत्त