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पुरुष और महिला वर्ग में छाया मध्य रेलवे मुंबई

Sun, 06 Nov 2016 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रामनगर
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पुरुष और महिला वर्ग में छाया मध्य रेलवे मुंबई - फोटो : अमर उजाला
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48वीं अखिल भारतीय रेलवे क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप 2016-17 का खिताब मध्य रेलवे मुंबई ने अपने नाम कर लिया। पुरुष वर्ग में मध्य रेलवे मुंबई के अभिषेक पाल जबकि महिला वर्ग में भी वहीं की स्वाती गाडवे ने खिताब जीता।
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प्रतियोगिता में 65 पुरुष और 45 महिला प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में भाग ले रही महिला प्रतिभागियों का भारत की ओर से तीन हजार मीटर दौड़ में रियो ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं ललिता बाबर ने भी दौड़कर मनोबल बढ़ाया।

खास बात यह रही कि उत्तराखंड में पहली बार पूर्वोत्तर रेलवे क्रीड़ा संघ गोरखपुर की ओर से यह प्रतियोगिता आयोजित कराई गई। इस प्रतियोगिता में नेशनल टीम के लिए भी खिलाड़ियों का चयन किया गया।
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शनिवार सुबह राजकीय महाविद्यालय क्रीड़ा मैदान से शुरू हुई क्रॉस कंट्री का शुभारंभ मुख्य अतिथि मंडल के महाप्रबंधक प्रवीण अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस दौरान आस्थान के एमडी राजीव अग्रवाल, प्रेम जैन भी मौजूद रहे।

पहले वर्ग में पुरुषों की 12 किमी की दौड़ सुबह 7:15 बजे और उसके बाद महिला वर्ग की आठ किमी की दौड़ शुरू हुई। धावक महाविद्यालय से कोसी बैराज होते हुए रामनगर वन प्रभाग के सीतावनी क्षेत्र तक गए, जहां रास्ते में रेलवे के अधिकारी भी मौजूद रहे।

दौड़ में करीब 25 ओलंपियंस, डेढ़ दर्जन अंतरराष्ट्रीय स्तर के धावक भी शामिल रहे। पुरुष वर्ग में मध्य रेलवे मुंबई के अभिषेक पाल प्रथम, उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद के विरेंद्र पाल द्वितीय, मध्य रेलवे मुंबई के हर्षद मात्रे तृतीय, पश्चिम रेलवे मुंबई के योगेंद्र कुमार चौथे स्थान पर रहे। इसी तरह महिला वर्ग में मध्य रेलवे मुंबई की स्वाती गाडवे प्रथम, मध्य रेलवे मुंबई की मनीषा सोलंकी द्वितीय, पश्चिमी रेलवे मुंबई की किरण तृतीय, पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर की मोनिका चौधरी चौथे स्थान पर रहीं।

मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों सीओ स्वतंत्र कुमार, मदर्स ग्लोरी स्कूल की चेयरपर्सन मीना पांथरी ने विजेताओं को मेडल, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व मदर्स ग्लोरी स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए।

इस दौरान विनोद पोखरियाल, मनोहर पंत, महिपाल डंगवाल, नंदन नेगी, दीपक कोठीवाल, पराग अग्रवाल, गौरव कुमार सिंह, पदमवीर सिंह, राजकुमार सिंह, एसजी रमोला, अन्नू कुमार, डीपी जुयाल आदि मौजूद रहे।

स्थानीय जूनियर खिलाड़ियों ने भी ललिता से सीखे टिप्स

अखिल भारतीय रेलवे क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने पहुंचीं एवं रियो ओलंपिक का हिस्सा रहीं ललिता बाबर को अपने बीच पाकर बच्चे भी काफी उत्साहित नजर आए। बच्चों ने उनके साथ सेल्फी ली, ऑटोग्राफ लिए, साथ ही उनसे टिप्स भी लिए।

ओलंपियन ललिता से मिलने के बाद स्थानीय खिलाड़ी गरिमा और गंजन ने कहा वह बहुत ही मिलनसार है। उन्होंने दौड़ से संबंधित कई टिप्स उनसे लिए। ज्योति, मानसी और बॉक्सिंग कोच नंदन सिंह नेगी भी ललिता बाबर से मिलकर काफी उत्साहित नजर आए।

वहीं ओलंपियन ललिता बाबर ने भी अपने प्रशंसकों के सवालों का बड़ी सरलता के साथ जवाब दिया। उन्होंने बच्चों का आह्वान किया कि खेलों में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर अपने क्षेत्र और देश का नाम रोशन करें।

जल्द ही रेलवे से अलविदा कहेंगी ओलम्पियन ललिता बाबर

रियो ओलंपिक का हिस्सा रहीं धावक ललिता बाबर (27) ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि जल्द ही वह रेलवे की नौकरी छोड़ अपने ही राज्य महाराष्ट्र में नौकरी करेंगी।

ललिता बाबर ने कहा ओलंपिक में भाग लेने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें वहां क्लास वन अधिकारी पद देने की घोषणा की थी। इसके चलते वह रेलवे छोड़ महाराष्ट्र सरकार की सेवा करने की सोच रही हैं।

धावक ललिता ने खुलासा किया कि परिवार वाले उनकी शादी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन वह 2017 में भारत में होने वाली एशियन चैंपियनशिप और उसी वर्ष लंदन में वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हैं।

उन्होंने कहा कि 2014 से लगातार अभ्यास में थी, लेकिन अभी ढाई महीने से किन्हीं कारणों से अभ्यास छूटा हुआ है। उन्होंने उत्तराखंड में पहली बार आकर विभाग द्वारा कराई गई प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया, लेकिन वह तीन किमी पर ही रुक गईं।

इस बारे में उन्होंने बताया कि मेरे विभाग के अन्य खिलाड़ियों के साथ यह आखिरी प्रतियोगिता हो सकती है, इसलिए उन सबके हौसलाअफजाई के लिए सभी से मिलने पहुंची थी।
उन्होंने कुमाऊं की प्रशंसा करते हुए कहा कि दौड़ के लिए बनाया गया रूट (उतार-चढ़ाव और जंगल के बीच) भी उन्हें काफी पसंद आया।

इसके साथ ही उन्होंने स्कूली बच्चों के कार्यक्रम की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी का एक लक्ष्य होना चाहिए, जिसके लिए मेहनत करनी चाहिए।

ओलंपियन ललिता ने कहा कि एशियाई देशों में एक-दो बार ही बड़े स्तर के गेम होते है, जिससे ज्यादा अनुभव नहीं मिल पाता। एशिया में बड़े स्तर के खेलों के और अधिक आयोजन पर उन्होंने जोर दिया।
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