हल्द्वानी। गौला नदी में खनिज निकासी की सभी अड़चन दूर हो गई हैं। नदी में खनिज निकासी के लिए पर्यावरणीय अनुमति मिल गई। वन निगम अधिकारियों के अनुसार अब खनिज निकासी के लिए कोई समस्या नहीं है।
प्रदेश में सबसे बड़ा खनन कार्य गौला नदी में होता है। यहां 1497 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खनन है। 22 फरवरी को नदी में खनिज निकासी की दस साल की अनुमति खत्म हो गई थी। बाद में पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 28 फरवरी तक खनिज निकासी फॉरेस्ट क्लीरियेंस दी थी। इस अनुमति के बाद भी पर्यावरणीय अनुमति की जरूरत थी। वन निगम के आरएम मोहन आर्या ने बताया कि राज्य स्तर से पर्यावरणीय अनुमति की जरूरत थी, जो मिल गई है। इसके अलावा राज्य से खनन को लेकर आदेश जारी हो गया है। अब खनिज निकासी को लेकर दिक्कत नहीं है। वन निगम दस साल की विधिवत अनुमति के लिए भी समानांतर प्रयास कर रहा है। मंत्रालय ने प्रस्ताव पर आपत्ति की थी, उसका जवाब तैयार कर अधिकारी के माध्यम से भेजा गया है। वहीं, डंपर एसो. अध्यक्ष मनोज मठपाल का कहना है कि स्टोन क्रशर स्वामियों से 35 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा देने की मांग की गई है। अगर यह भाड़ा मिलता है तो डंपर स्वामी खनिज निकासी करेंगे॥